उत्तराखंड का गौरव थे जसपाल राणा, भारतीय निशानेबाजी के युगपुरुष का निधन
देहरादून/नई दिल्ली, 12 जून। उत्तराखंड सहित पूरे देश के लिए शुक्रवार का दिन बेहद दुखद रहा। भारत के महान निशानेबाज, एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता, पद्मश्री एवं अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित ISSF विश्व कप से लौटने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। दिल्ली के अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
उत्तरकाशी की पावन धरती पर 28 जून 1976 को जन्मे जसपाल राणा ने अपने अद्भुत प्रदर्शन से उत्तराखंड का नाम विश्व पटल पर स्थापित किया। उन्होंने कम उम्र में ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और आगे चलकर भारतीय निशानेबाजी के सबसे सफल खिलाड़ियों में अपनी पहचान बनाई।
जसपाल राणा ने एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और अनेक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए स्वर्ण सहित कई पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। उन्हें वर्ष 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्मश्री तथा वर्ष 2020 में उत्कृष्ट कोचिंग के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
खिलाड़ी के रूप में सफलता के बाद उन्होंने भारतीय शूटिंग को नई दिशा दी। ओलंपिक पदक विजेता Manu Bhaker सहित अनेक युवा निशानेबाजों को तराशकर उन्होंने भारत को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। उनकी कोचिंग में भारतीय निशानेबाजी ने अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल कीं।
जसपाल राणा का उत्तराखंड से विशेष लगाव रहा। उनके पिता नारायण सिंह राणा भारतीय सीमा सुरक्षा बल के पूर्व अधिकारी, 1971 युद्ध के वीर सैनिक तथा उत्तराखंड राज्य के प्रथम खेल मंत्री रहे। खेलों के विकास और युवाओं को प्रेरित करने में राणा परिवार का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
प्रधानमंत्री Narendra Modi सहित देशभर के खिलाड़ियों, खेल संगठनों और विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों ने जसपाल राणा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे भारतीय खेल जगत की अपूरणीय क्षति बताया।
जसपाल राणा का निधन केवल एक खिलाड़ी का जाना नहीं, बल्कि उत्तराखंड की उस प्रेरणा का अवसान है जिसने हिमालय की वादियों से निकलकर विश्व मंच पर भारत का तिरंगा बुलंद किया। उनका संघर्ष, अनुशासन और उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी।
