July 28, 2026

2027 विधानसभा चुनाव में कोटद्वार के पूर्व सैनिक बनेंगे निर्णायक शक्ति

उत्तराखंड के आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इस बीच कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र में पूर्व सैनिकों और सैनिक परिवारों की भूमिका को लेकर चर्चाएं भी बढ़ गई हैं। क्षेत्र में पूर्व सैनिकों, सेवारत सैनिकों और उनके परिजनों की संख्या 37 हजार से अधिक बताई जा रही है, जो किसी भी चुनावी मुकाबले का रुख बदलने की क्षमता रखती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कोटद्वार विधानसभा में सैनिक पृष्ठभूमि से जुड़े मतदाता हमेशा से एक प्रभावशाली वोट बैंक रहे हैं। यही कारण है कि सभी प्रमुख राजनीतिक दल इस वर्ग को अपने पक्ष में करने के प्रयासों में जुटे हुए हैं।

पूर्व सैनिकों की राजनीतिक ताकत का अंदाजा हाल ही में हुए निकाय चुनावों से भी लगाया जा सकता है। नगर निगम चुनाव में पूर्व सैनिकों ने अपना स्वतंत्र उम्मीदवार महेंद्र पाल सिंह मैदान में उतारा था, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए थे। इस कदम ने यह संकेत दिया कि पूर्व सैनिक अब केवल मतदाता की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि राजनीतिक निर्णयों में अपनी सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित करना चाहते हैं।

अब 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भी पूर्व सैनिक समुदाय ने अपने इरादे स्पष्ट करने शुरू कर दिए हैं। विभिन्न बैठकों और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से सैनिक हितों, क्षेत्रीय विकास, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं और पूर्व सैनिकों से जुड़े मुद्दों को चुनावी एजेंडे में शामिल करने की मांग उठाई जा रही है।

पूर्व सैनिकों का कहना है कि जो भी राजनीतिक दल या प्रत्याशी उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को प्राथमिकता देगा, उसे उनका समर्थन मिल सकता है। ऐसे में कोटद्वार विधानसभा सीट पर पूर्व सैनिक और उनके परिवार आगामी चुनाव में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह वर्ग संगठित होकर किसी एक दिशा में मतदान करता है तो 2027 के विधानसभा चुनाव में कोटद्वार सीट के परिणामों पर उसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। यही वजह है कि आने वाले समय में इस वोट बैंक पर सभी दलों की नजरें टिकी रहेंगी।

महेन्द्र पाल सिंह अध्यक्ष,पूर्व सैनिक संघर्ष समिति

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