खटीमा के जंगल में हाथी की संदिग्ध मौत, करंट लगने की आशंका
ऊधम सिंह नगर के खटीमा से वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। खटीमा रेंज के उत्तरी बनबसा कंपार्टमेंट नंबर-5 से सटे जंगल में एक नर हाथी (टस्कर) मृत अवस्था में मिला है। घटनास्थल पर बिजली के तार मिलने के बाद प्रथम दृष्टया हाथी की मौत करंट लगने से होने की आशंका जताई जा रही है। वन विभाग ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है और एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, रविवार को शारदा नहर के किनारे सुरंग के पास स्थित एक खेत में करीब 10 से 15 वर्ष आयु का टस्कर मृत अवस्था में पड़ा मिला। इसकी सूचना मिलते ही वन बीट आरक्षी दीपू सिंह ने उच्च अधिकारियों को अवगत कराया। इसके बाद रेंजर हरेंद्र बिष्ट के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सुरक्षा के मद्देनज़र पूरे क्षेत्र की बैरिकेडिंग कर आम लोगों की आवाजाही रोक दी।
घटना की सूचना पर डीएफओ हिमांशु बांगड़ी सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। हल्द्वानी से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों के पैनल ने डॉ. राहुल सती की अध्यक्षता में हाथी का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग ने नियमानुसार हाथी के शव को दफना दिया। अधिकारियों के अनुसार हाथी के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं और उसके दांतों को सुरक्षित संरक्षित कर लिया गया है।
प्रारंभिक जांच में घटनास्थल से बिजली के तार बरामद हुए हैं, जिससे प्रथम दृष्टया करंट लगने से हाथी की मौत की आशंका मजबूत हुई है। वन विभाग ने मौके से विभिन्न सैंपल भी एकत्र किए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि करंट वाले तार किसने लगाए थे और उन्हें बिजली के किस स्रोत से जोड़ा गया था।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट एक-दो दिन में मिलने की संभावना है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। यदि जांच में किसी व्यक्ति की लापरवाही या संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वन विभाग ने इस घटना को अत्यंत गंभीर मानते हुए पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। वहीं, इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध रूप से लगाए जाने वाले करंट वाले तारों के खतरे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हिमांशु बांगड़ी, डीएफओ
