लोक संवर्धन पर्व के दूसरे दिन उमड़ी भीड़, संस्कृति, शिल्प और लोक संगीत का दिखा रंगारंग संगम
भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय तथा उत्तराखण्ड सरकार के उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम के संयुक्त तत्वावधान में परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित छठे लोक संवर्धन पर्व के दूसरे दिन बड़ी संख्या में लोगों ने महोत्सव में भाग लेकर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्पकला, क्षेत्रीय व्यंजनों और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। पांच दिवसीय इस महोत्सव में देशभर से आए कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और उद्यमियों को अपनी कला एवं उत्पादों के प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर का मंच उपलब्ध कराया गया है।
महोत्सव परिसर में लगाए गए 150 से अधिक प्रदर्शनी स्टॉलों पर पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा वस्त्र, विरासत शिल्प और विभिन्न राज्यों के क्षेत्रीय उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहे। मास्टर कारीगरों द्वारा आयोजित लाइव क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से आगंतुकों ने पारंपरिक शिल्पकला की बारीकियों को करीब से देखा और भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध परंपराओं से रूबरू होने का अवसर प्राप्त किया।
फूड कोर्ट में उत्तराखण्ड के पारंपरिक पहाड़ी और कुमाऊंनी व्यंजनों के साथ देश के विभिन्न राज्यों के लोकप्रिय पकवानों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। वहीं, दिन के दौरान आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों और वयस्कों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और विरासत पर आधारित अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के परिणाम महोत्सव के अंतिम दिन घोषित किए जाएंगे।
कारीगरों और उद्यमियों की क्षमता विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (निसबड) द्वारा एक संवादात्मक ज्ञान सत्र आयोजित किया गया। राज्य प्रमुख बीरेंद्र सिंह सजवाण और शैलेश रावत के संचालन में आयोजित इस सत्र में उद्यमिता विकास, व्यवसाय विस्तार, ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और बाजार से जुड़ाव जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही प्रतिभागियों को अपने उद्यमों को सशक्त बनाने और बाजार तक पहुंच बढ़ाने के लिए व्यावहारिक सुझाव भी दिए गए।
इस अवसर पर उत्तराखण्ड सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर ने कहा कि लोक संवर्धन पर्व भारत की जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं और कारीगरों की अद्भुत प्रतिभा का उत्सव है। उन्होंने कहा कि आगंतुकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी स्वदेशी शिल्प के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती है और यह आयोजन कारीगरों को बाजार से जोड़ने, व्यवसाय विस्तार तथा स्थायी आजीविका के नए अवसर प्रदान कर रहा है।
उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम की निदेशक दीप्ति सिंह ने कहा कि यह महोत्सव कारीगरों, उद्यमियों और आगंतुकों के लिए एक साझा मंच बन चुका है, जहां शिल्प, संस्कृति और नवाचार का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनियों, ज्ञान सत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से यह आयोजन न केवल कारीगरों को सशक्त बना रहा है, बल्कि देश की समृद्ध पारंपरिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
शाम को आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने महोत्सव की रौनक और बढ़ा दी। कार्यक्रम की शुरुआत उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध लोकगायक नरेश बादशाह की मनमोहक प्रस्तुति से हुई, जिन्होंने अपने लोकप्रिय लोकगीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद प्रसिद्ध बॉलीवुड एवं पंजाबी गायिका ज्योति नूरां ने अपनी दमदार आवाज़ से समां बांध दिया। उन्होंने ‘पटाखा गुड्डी’, ‘वारी जावां’, ‘तेरा नूर’ और ‘पांव की जुत्ती’ सहित कई लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए, जिन्हें दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ खूब सराहा।
लोक संवर्धन पर्व का यह आयोजन कला, संस्कृति, शिल्प और उद्यमिता को एक मंच पर लाकर न केवल भारत की सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मना रहा है, बल्कि स्थानीय और पारंपरिक कारीगरों को नए बाजार और पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।