‘ब्लैक हरेला’ विरोध पर वन मंत्री का पलटवार, बोले- कुछ लोगों को है ‘छपास की बीमारी’
हरेला पर्व से एक दिन पहले 15 जुलाई को ऋषिकेश-देहरादून के भानियावाला मार्ग चौड़ीकरण परियोजना के लिए प्रस्तावित हजारों पेड़ों की कटाई के विरोध में पर्यावरण प्रेमियों और युवाओं द्वारा मनाए गए ‘ब्लैक हरेला’ अभियान पर अब प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल का बयान सामने आया है।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने विरोध कर रहे लोगों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों को केवल “छपास की बीमारी” है और वे बिना पूरी जानकारी के विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शुरू से ही इकोलॉजी (पर्यावरण संरक्षण) और इकोनॉमी (विकास) के बीच संतुलन बनाकर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि यदि उत्तराखंड को विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाना है तो बेहतर सड़क और परिवहन सुविधाओं के लिए कनेक्टिविटी मजबूत करना भी आवश्यक है। ऐसे विकास कार्यों के लिए कई बार वन भूमि का हस्तांतरण करना पड़ता है और कुछ पेड़ों की कटाई भी करनी पड़ती है।
वन मंत्री ने स्पष्ट किया कि वन भूमि हस्तांतरण के मामलों में पर्यावरणीय नियमों का पूरी तरह पालन किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई होती है तो उसके बदले नियमानुसार उससे अधिक संख्या में पौधारोपण करने का प्रावधान है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सके।
गौरतलब है कि हरेला पर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में पर्यावरण कार्यकर्ताओं, युवाओं और स्थानीय लोगों ने भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन परियोजना के लिए प्रस्तावित पेड़ों की कटाई का विरोध करते हुए इसे ‘ब्लैक हरेला’ के रूप में मनाया था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए और बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के विकल्प तलाशे जाने चाहिए।
वन मंत्री के बयान के बाद विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर प्रदेश में बहस और तेज होने की संभावना है।
सुबोध उनियाल, वन मंत्री उत्तराखंड
