August 8, 2026

कॉर्बेट में घड़ियाल संरक्षण की बड़ी पहल, ढाई साल तक चलेगा वैज्ञानिक अध्ययन

Corbett

विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व अब केवल बाघ संरक्षण ही नहीं, बल्कि संकटग्रस्त घड़ियालों के वैज्ञानिक संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है। भारत सरकार और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के सहयोग से शुरू की गई विशेष शोध परियोजना के तहत अगले दो से ढाई वर्षों तक घड़ियालों के प्राकृतिक आवास, उनकी आबादी और नेस्टिंग साइट्स का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां बाघ, तेंदुआ, एशियाई हाथी, भालू, हिरणों की कई प्रजातियों के साथ 500 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां और अनेक दुर्लभ वन्यजीव पाए जाते हैं। अब इसी जैव विविधता के महत्वपूर्ण हिस्से रहे संकटग्रस्त (क्रिटिकली एंडेंजर्ड) घड़ियालों के संरक्षण को लेकर यह नई पहल शुरू की गई है।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य घड़ियालों के प्राकृतिक आवास की मैपिंग, उनकी वास्तविक संख्या का आकलन और नेस्टिंग साइट्स का वैज्ञानिक विश्लेषण करना है। अध्ययन के आधार पर भविष्य में घड़ियाल संरक्षण के लिए प्रभावी और दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जाएगी।

उन्होंने बताया कि शोध के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि घड़ियाल किन स्थानों पर अंडे देते हैं, उन नेस्टिंग साइट्स पर कौन-कौन से खतरे मौजूद हैं और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए किन उपायों की आवश्यकता है। इससे घड़ियालों के प्रजनन चक्र को बेहतर ढंग से समझने और उनके प्राकृतिक आवास को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

डॉ. बडोला के अनुसार हाल ही में किए गए सर्वेक्षण में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में लगभग 150 से 200 घड़ियाल दर्ज किए गए हैं, जिनमें नर, मादा और शावक शामिल हैं। वहीं उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों के अनुसार कॉर्बेट क्षेत्र में 197 मगरमच्छ, 183 घड़ियाल और 161 ओटर्स मौजूद हैं, जो यहां की समृद्ध जलीय जैव विविधता का प्रमाण हैं।

उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत मानसून से पहले पहला सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है, जबकि दूसरा सर्वेक्षण बारिश समाप्त होने के बाद किया जाएगा। लगभग ढाई वर्षों तक चलने वाले इस अध्ययन के निष्कर्ष न केवल कॉर्बेट, बल्कि पूरे देश में घड़ियाल संरक्षण की भावी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से होकर बहने वाली रामगंगा नदी घड़ियाल, मगरमच्छ और ओटर्स जैसे दुर्लभ जलीय जीवों का प्रमुख आवास है। ऐसे में यह परियोजना जलीय जैव विविधता के संरक्षण और संकटग्रस्त प्रजातियों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जिससे भविष्य में देशभर में संरक्षण प्रयासों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

डॉ साकेत बडोला,
डायरेक्टर
कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व

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