राष्ट्रीय खेल दिवस पर संस्कृत विश्वविद्यालय में खेल और योग प्रतियोगिताओं का आयोजन
राष्ट्रीय खेल दिवस-2026 के अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में विद्यार्थियों में खेल भावना, अनुशासन, स्वस्थ जीवनशैली तथा शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न खेल और योग प्रतियोगिताओं का आयोजन उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
कार्यक्रम के संयोजक एवं योग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीनारायण जोशी ने कहा कि खेल जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। नियमित खेलकूद से शरीर स्वस्थ रहने के साथ मन में एकाग्रता, आत्मविश्वास, अनुशासन, धैर्य और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। उन्होंने कहा कि योग और खेल स्वस्थ एवं संतुलित जीवन के मजबूत आधार हैं। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ प्रतिदिन खेल और योग के लिए भी समय निकालना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को “एक घंटा खेल के मैदान में” और “खेलेगा देश, खिलेगा देश” के संदेश को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया। सूर्य नमस्कार प्रतियोगिता में मनीष ने प्रथम, संध्या ने द्वितीय और गौरी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। आसन प्रतियोगिता में मानसी प्रथम, गौरी द्वितीय और विभा तृतीय रहीं। वहीं शुद्ध क्रिया प्रतियोगिता में निक्की ने प्रथम, दिया ने द्वितीय और तनिष ने तृतीय स्थान हासिल किया।
दौड़ प्रतियोगिता के बालक वर्ग में निशांत ने प्रथम, विनोद ने द्वितीय और हिमांशु पंत ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। बालिका वर्ग में समीक्षा प्रथम, अंशिका द्वितीय और रिया तृतीय रहीं।
रस्साकशी के बालक वर्ग में विनोद, अमन कुमार, अखिल, निखिल, प्रदीप, शिवम, पवन कुमार, सुशील कुमार, पीयूष मालिक और अभिषेक की टीम विजेता रही। वहीं दिव्यांशु, सुजल, सागर, कमलेश, विवेक, वंश, दुर्गेश, दिव्यांशु, नीरज और अनुज की टीम उपविजेता रही।
रस्साकशी के बालिका वर्ग में गौरी, मानसी, निक्की, विभा, तनिष, दिया और ईशा की टीम ने विजेता का खिताब हासिल किया, जबकि अमिता, लवली, रिया, समीक्षा, अंशिका, संध्या और आरोही की टीम उपविजेता रही। स्पून दौड़ प्रतियोगिता में मानसी ने प्रथम, निक्की ने द्वितीय और समीक्षा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
सभी प्रतियोगिताओं में श्री राजेंद्र प्रसाद नौटियाल, डॉ. मोहित कुमार और आचार्य लोकेश शास्त्री ने निर्णायक की भूमिका निभाई।
समापन अवसर पर क्रीड़ा अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि खेल केवल जीत का माध्यम नहीं हैं, बल्कि जीवन में संघर्ष करने, चुनौतियों का सामना करने और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देते हैं। खेल भावना व्यक्ति को हार स्वीकार कर उससे सीखने और अगली सफलता के लिए और अधिक मेहनत करने का संदेश देती है। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित रूप से खेल गतिविधियों में भाग लेने का आह्वान किया।