एथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज,
Delhi, 31 August 2026,
दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज पेट्रोल पंपों के डिस्पेसिंग नोजल और ईंधन की रसीद पर एथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए संबंधित हाई कोर्ट का रुख करने की स्वतंत्रता दी है। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई की।सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता गोस्वामी ने दलील दी कि उपभोक्ताओं को यह ज्ञात होना चाहिए कि वे जो ईंधन खरीद रहे हैं, उसमें एथेनॉल की मात्रा कितनी फीसदी है। और वास्तविक संरचना क्या है? उन्होंने पेट्रोल की रसीद दिखाते हुए कहा कि उसमें एथेनॉल की मात्रा का कोई उल्लेख नहीं है।
इस पर भारत के अटॉर्नी जनरल ने याचिका के तरीके पर आपत्ति जताई।’ इसके जवाब में गोस्वामी ने कहा कि उनकी मांग व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश के नागरिकों के अधिकार से जुड़ी है। हमें यह जानने का अधिकार है कि हम क्या खरीद रहे हैं। अटॉर्नी जनरल ने इस याचिका को ‘प्रॉक्सी पिटीशन’ बताया। सुप्रीम कोर्ट पिछले साल इसी तरह की एक याचिका खारिज कर चुका है।
याचिका में पेट्रोलियम मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय मानक ब्यूरो , उपभोक्ता संगठनों, ऑटोमोबाइल इंजीनियरों, ईंधन तकनीक विशेषज्ञों, पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों तथा जल संसाधन विशेषज्ञों को शामिल कर एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग भी की गई थी।
याचिका में मांग को गई पेट्रोल पंप के नोजल पर एथेनॉल की सटीक प्रतिशत मात्रा साफ शब्दों में लिखी जाए। ग्राहक को मिलने वाले हर ईंधन बिल या रसीद पर एथेनॉल का प्रतिशत दर्ज हो। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी को राहत देते हुए,अपनी शिकायतों के समाधान के लिए संबंधित हाई कोर्ट जाने की छूट दी है।
