सुभाष चंद्रा से जुड़े 22 हजार करोड़ रुपये के कर्ज सेटलमेंट:संपत्ति बेचकर देनदारी चुकायी है:डॉ. सुभाष चंद्रा
Delhi, 28 August 2026,
एस्सेल ग्रुप और ज़ी नेटवर्क के संस्थापक तथा पूर्व राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्रा से जुड़े 22 हजार करोड़ रुपये के कर्ज सेटलमेंट मामले में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा हाल ही में मंजूर किए गए सेटलमेंट प्लान के खिलाफ एचडीएफसी बैंक के साथ-साथ एवं एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस इस फैसले के विरुद्ध खड़े हो गए हैं। ये दोनों ही वित्तीय संस्थान नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी ) का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं।
ज्ञातव्य हो कि, एनसीएलएटी ने एस्सेल ग्रुप की कंपनियों द्वारा लिए गए 22,000 करोड़ रुपये के कर्ज निपटारे को अपनी हरी झंडी दे दी है। इस भारी-भरकम कर्ज के लिए ज़ी के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने गारंटर के रूप में जिम्मेदारी ली थी।य मंजूर किए गए प्लान के मुताबिक, मुख्य कर्जदारों से 1,494 करोड़ रुपये की वसूली अभी की जा सकती है। वहीं निजी गारंटर के तौर पर सुभाष चंद्रा को महज 6.25 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। इसी बात पर कुछ बैंकों ने तीखी आपत्ति जताई है. हालांकि, कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स सीओसी में शामिल 80 फीसदी लेनदारों ने वोटिंग के जरिए इस सेटलमेंट का पूरा समर्थन किया था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस सेटलमेंट पर कई सरकारी व प्राइवेट बैंकों ने अपनी असहमति दर्ज कराई थी। इनमें एचडीएफसी बैंक, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस , एक्सिस बैंक, केनरा बैंक, आरबीएल बैंक व यूनियन बैंक मुख्य रूप से शामिल हैं। बता दें कि, एचडीएफसी बैंक ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया था। अब एचडीएफसी बैंक, एवं एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने अपील करने का फैसला किया है।
एनसीएलटी द्वारा मंजूर किए गए सेटलमेंट प्लान को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार और ट्रिब्यूनल पर जोरदार हमला बोला है। जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि इंसॉल्वेंसी के नाम पर दी गई यह राहत दरअसल ‘हेयरकट’ नहीं, बल्कि बैंकों का सरेआम ‘मुंडन’ है। उन्होंने कहा कि इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड- 2016 को इसलिए लाया गया था ताकि बैंकों का फंसा हुआ पैसा जल्दी वापस आ सके, लेकिन इस तरह 99 फीसदी से ज्यादा का डिस्काउंट देना इस कानून का सीधा-साधा मखौल उड़ाना है।
वहीं नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल लोन मामले में एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने प्रतिक्रिया दी है। सुभाष चंद्रा ने कहा कि हमने अपनी संपत्ति बेचकर देनदारी चुकायी है। मीडिया रिपोर्ट्स में चल रहे 22,000 करोड़ रुपये के पर्सनल लोन के आरोप तथ्यहीन हैं। डॉ. चंद्रा ने स्पष्ट किया कि, उन्होंने किसी भी लेनदार से व्यक्तिगत तौर पर कोई कर्ज नहीं लिया, वह केवल उनके पर्सनल गारंटर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम एक-एक पैसा चुकाने के लिए तैयार हैं और हमने अपनी संपत्ति बेचकर देनदारी चुकाई है।
डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि मेरी नेट वर्थ 45000 करोड़ रुपये बताई गई है. मैंने अब तक 60 से 70 हजार करोड़ रुपये का ब्याज दिया है, हम एक-एक पैसा चुकाने के लिए तैयार हैं. उन्होंने बताया, यह पूरा मामला पर्सनल गारंटी कुछ लेंडर्स के लिए साइन करने का है. 22,000 करोड़ रुपये की राशि अलग-अलग कंपनियों के लोन के लिए दी गई पर्सनल गारंटी से जुड़ी है. इसे उनका पर्सनल कर्ज बताना सही नहीं है।
