September 11, 2026

सुप्रीम कोर्ट में 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी गैंगस्टर अबू सलेम की रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज

Mumbai, 10 September 2026,

सुप्रीम कोर्ट ने आज 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी गैंगस्टर अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के अप्रैल 2026 के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने सलेम की याचिका को समय पूर्व और भ्रामक माना।

सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका गुरुवार को खारिज कर दी। सलेम ने अपनी याचिका में दावा किया था कि जेल में अच्छे आचरण के लिए मिली रिमिशन और अंडरट्रायल के तौर पर जेल में बिताई गई अवधि को उसकी सजा की 25 साल की अधिकतम अवधि में शामिल किया जाना चाहिए। बता दें कि अबू सलेम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।

बता दें कि वॉन्‍टेड गैंगस्‍टर को पुर्तगाल से प्रत्‍यर्पित करा कर भारत लाया गया था। अबू सलेम ने अपनी याचिका में दावा किया था कि जेल में अच्छे आचरण के लिए मिली रिमिशन और अंडरट्रायल के तौर पर जेल में बिताई गई अवधि को उसकी सजा की 25 साल की अधिकतम अवधि में शामिल किया जाना चाहिए। पिछली सुनवाई के दौरान पीठ ने संकेत दिया था कि वह सलेम की याचिका खारिज भी हो सकती है। हालांकि, अदालत ने उस समय आदेश सुरक्षित रखते हुए दोनों पक्षों को लिखित दलीलें दाखिल करने की अनुमति दी थी।

सलेम ने अच्‍छे आचरण का हवाला देते हुए कहा कि, मांग केवल जेल में अच्छे व्यवहार के आधार पर अर्जित रिमिशन को 25 साल की अवधि में जोड़ने की थी। दलील के मुताबिक, सलेम ने जेल में अच्छे आचरण के आधार पर करीब तीन साल और दो महीने की रिमिशन अर्जित की है। उसके वकील ने यह भी तर्क दिया था कि कुछ अन्य दोषियों को ऐसी रिमिशन को ध्यान में रखते हुए रिहा किया गया है।

सलेम की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को भी चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के दौरान भारत की ओर से दी गई 25 साल की अवधि की गारंटी कोई निश्चित सजा नहीं दी सुप्रीम कोर्ट ने सभी दलीलों पर विचार करने के बाद अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई की मांग को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में उसकी सजा से जुड़ी यह कानूनी चुनौती भी समाप्त हो गई।

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