राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों से सीधा संवाद: कहा हम सिस्टम के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं,
Delhi 20 September 2026,
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इंदौर मध्य प्रदेश में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में आए छात्रों से सीधा संवाद किया। उन्होंने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों को लगता है कि जिस व्यवस्था को उनकी मदद और सुरक्षा के लिए, और विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की रक्षा के लिए बनाया गया है, वही उन पर हमला कर रही है। उन्होंने कहा कि हम सिस्टम के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं। राहुल गांधी ने सवाल पूछा,यह सिस्टम क्या है? इस सिस्टम में सबसे ऊपर छह लोग बैठे हैं जो इसे चलाते हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियां लोकतंत्र विरोधी हैं। वे डराने-धमकाने, छात्रों की पिटाई, कील लगी लाठियों के इस्तेमाल और पैलेट गन चलाने जैसे काम करते हैं। गृहमंत्री इसे लागू करने वाले इनफोर्सर हैं। अजीत डोभाल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। जो अनौपचारिक बातचीत में वह कहते हैं कि भारत को कंट्रोल करने के लिए सिर्फ़ 500 लोगों को कंट्रोल करना काफ़ी है। उन्होंने भारत के टेलीफ़ोन, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया कम्युनिकेशन पर कंट्रोल कर लिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक मुखिया मोहन भागवत जी, जो विचारधारा का काम देखते हैं। उनके संगठन को स्कूल, कॉलेज और संस्थान चलाने के लिए हज़ारों करोड़ रुपये मिलते हैं। व्यवसायी अडानी जी हैं और दूसरी तरफ़ अंबानी जी। सिस्टम ने हर संस्थान में अपने ही लोगों को बिठा रखा है। उन्होंने कहा कि सिस्टम को छात्रों से खतरा महसूस होता है। क्यों? क्योंकि छात्र सवाल पूछते हैं।
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम’ राहुल गांधी के साथ संवाद के दौरान एक छात्र ने पूछा कि , गृहमंत्री अमित शाह का बेटा क्रिकेट एसोसिएशन का चेयरमैन कैसे बना एक छात्र पूछता है कि, यह कैसे दो लोगों ने भारत के पूरे बिज़नेस जगत पर कब्ज़ा कर लिया? एक छात्र पूछता है कि न्यायपालिका और दूसरी संस्थाएं अपना काम करने में क्यों नाकाम रहती हैं? चुनाव आयोग अपनी ज़िम्मेदारियां क्यों नहीं निभा रहा है? एक छात्रा ने दावा किया कि उसने और कुछ छात्रों ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग में कथित अनियमितताओं का मामला उठाया तो उन पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया।
राहुल गांधी ने कहा सिस्टम को छात्र नहीं चाहिए? सिस्टम को ‘अंधभक्त’ चाहिए। अंधभक्त, (पार्टी के समर्थक ) छात्र का ठीक उल्टा होता है। जहाँ छात्र निडर होता है, वहीं अंधभक्त डरपोक होता है। अंधभक्त कभी सवाल नहीं पूछते। वह कभी यह नहीं पूछेगा कि हमारे स्कूलों और कॉलेजों की हालत ऐसी क्यों हो गई है? हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर क्यों चरमरा गया है? हमारे पेपर क्यों लीक हो रहे हैं? छात्र ही वह व्यक्ति है जो इस मुद्दे पर आवाज़ उठाता है।
राहुल गांधी ने छात्रों को संबोधित करते हुए बताया कि देश में 10 लाख शिक्षकों के पद ख़ाली हैं। वहीं एक लाख हैं स्कूल बंद हो गए हैं। उन्होंने दावा किया कि, 2014 में कांग्रेस सरकार ने शिक्षा के बजट में करीब 4.6 फीसदी आवंटित किया था। जो अब लगभग 2.7 फीसदी रह गया है।
