केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत को दी मंजूरी,
Delhi 28 October 2026,
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (डीए) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (डीआर) की एक अतिरिक्त किस्त जारी करने को मंजूरी दे दी है। यह 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी होगी। इसमें मूल वेतन/पेंशन के मौजूदा 60 प्रतिशत की दर के अतिरिक्त 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, ताकि बढ़ती महंगाई की भरपाई की जा सके⁶७।
महंगाई भत्ते और महंगाई राहत, दोनों में इस बढ़ोतरी से सरकारी खजाने पर सालाना 10,016.10 करोड़ रुपये का कुल भार पड़ेगा। इससे केंद्र सरकार के लगभग 48.54 लाख कर्मचारियों और 68.71 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा। यह बढ़ोतरी 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर स्वीकृत फॉर्मूले के अनुसार की गई है।
इसके साथ ही केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने केन्द्र प्रायोजित एक योजना (सीएसएस), प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (पीएम वीजीएसवाई) को मंजूरी दे दी है। यह विकसित भारत की राष्ट्रीय कल्पना के अनुरूप अगली पीढ़ी की शासन व्यवस्था में बदलाव की पहल है। इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू करने की मंजूरी दी गई है (इसकी अवधि सोलहवें वित्त आयोग की अवधि के साथ समाप्त होगी)।
वित्तीय प्रभाव और लाभार्थियों की संख्या
इस योजना का कुल परिव्यय 7,395.55 करोड़ रुपये है, जिसमें केन्द्र का हिस्सा 4,869.48 करोड़ रुपये और राज्य का हिस्सा 2,526.07 करोड़ रुपये है।
इस योजना से 2.55 लाख से अधिक पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों के लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ-साथ पंचायत पदाधिकारियों और अन्य हितधारकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। जागरूकता पैदा करने से संबंधित प्रत्येक कार्यक्रम के माध्यम से कम से कम 1 करोड़ नागरिकों तक पहुंच बनाई जाएगी।
इस योजना का कार्यान्वयन संबंधित राज्य सरकारों और केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों के माध्यम से किया जाएगा। राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश योजना के उद्देश्यों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप गतिविधियों, प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं का उल्लेख करते हुए वार्षिक कार्ययोजनाएं प्रस्तुत करेंगे। नामित केन्द्रीय अधिकार प्राप्त समिति लागू प्रक्रियाओं और मानदंडों के अनुसार इन कार्ययोजनाओं का मूल्यांकन कर उन्हें मंजूरी देगी। केन्द्र सरकार और राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश अपनी-अपनी जिम्मेदारी वाले क्षेत्रों में कार्य करेंगे। इसके लिए समन्वय, तकनीकी सहायता, निगरानी और समीक्षा की व्यवस्था की जाएगी। जमीनी स्तर पर योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मौजूदा संस्थागत, क्षमता निर्माण, डिजिटल और संचार प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा।
कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना’ (सीएमपीएस) को भी मिली मंजूरी:
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2039-40 तक के लिए 10,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ ‘कंटेनर विनिर्माण संवर्धन योजना’ (सीएमपीएस) को मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य भारत में विश्व-स्तरीय प्रतिस्पर्धी कंटेनर निर्माण इकोसिस्टम तैयार करना, आयात पर निर्भरता कम करना और आपूर्ति शृंखला को और भी अधिक मजबूत बनाना है। इस योजना का मकसद नई निर्माण इकाइयों को समर्थन देना और मौजूदा कंटेनर निर्माण इकाइयों का विस्तार करना है।
कंटेनर विनिर्माण योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी। 859 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाली ‘इंटरेस्ट सबवेंशन असिस्टेंस’ (आईएसए) योजना के तहत, कंटेनर निर्माताओं को 3 प्रतिशत प्रति वर्ष की ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। यह सब्सिडी उन पात्र टर्म लोन (पूंजीगत ऋण) पर मिलेगी, जिनका उपयोग ‘ग्रीनफील्ड’ कंटेनर निर्माण इकाइयां स्थापित करने या मौजूदा कंटेनर निर्माण क्षमताओं के विस्तार (‘ब्राउनफील्ड’ विस्तार) के लिए किया गया हो।
8,891 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ ‘ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर असिस्टेंस’ (ओईए) शुरू की गई है। इसका उद्देश्य वैश्विक शिपिंग मानकों के अनुसार निर्मित और पात्र निर्माताओं द्वारा बेचे जाने वाले सभी कंटेनरों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इससे लागत के अंतर को कम करने और घरेलू स्तर पर निर्मित कंटेनरों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
‘डायनामिक लोंगिट्यूडिनल इम्पैक्ट
डायनामिक लोंगिट्यूडिनल इम्पैक्ट टेस्टिंग’ जैसी साझा सुविधाओं की स्थापना में सहायता के लिए 150 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन (प्रमाणीकरण) संबंधी सहयोग प्रदान करना।
समग्र प्रभाव की परिकल्पना:
वार्षिक घरेलू कंटेनर निर्माण क्षमता में 7.5 लाख टीईयू तक लगभग दस गुना की वृद्धि।
गुणवत्तापूर्ण शिपिंग कंटेनरों के लिए भारत को वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने की क्षमता के साथ एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी विनिर्माण आधार तैयार होगा।
भारत की समुद्री और रसद आपूर्ति श्रृंखलाओं के अनुकूलन को मजबूती मिलेगी।
अनुमानित 3,000 प्रत्यक्ष रोजगार और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे, जबकि कॉर्नर कास्टिंग, विशेष स्टील, लकड़ी के फ्रेम और पेंट जैसे सहायक उद्योगों को समर्थन मिलेगा।
