दून बुक फेस्टिवल 2026 में आचार्य प्रशांत का संवाद सत्र बना आकर्षण का केंद्र
दून बुक फेस्टिवल 2026 में विश्वप्रसिद्ध दार्शनिक और लेखक आचार्य प्रशांत का संवाद सत्र श्रोताओं के लिए सबसे आकर्षक रहा। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में लोग घंटों तक उनके सत्र में जुड़े रहे, जो दर्शाता है कि साहित्य के साथ जीवन को समझने की दृष्टि भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
लेखिका अद्वैता काला के साथ संवाद सत्र में आचार्य प्रशांत ने सत्य और भ्रम के बीच अंतर स्पष्ट किया और कहा, “सच कड़वा नहीं होता; जिसे सच की जरूरत होती है, उसके लिए वही अंततः मीठा और आवश्यक होता है।” उन्होंने मानसिक ढांचे और सामाजिक मान्यताओं में कैद व्यक्ति की स्थिति को उजागर करते हुए बताया कि वास्तविक आध्यात्म का अर्थ भ्रमों को पहचानकर उनसे मुक्त होना है।
सत्र में विद्यार्थियों, साधकों और आम जनता के सवालों का उत्तर देते हुए उन्होंने भगवद्गीता के श्लोकों के संदर्भ में जीवन, शिक्षा, युवाओं की चुनौतियों, परीक्षा परिणामों, आत्म-ज्ञान और सफलता व असफलता की समझ पर गहरी बातें साझा कीं। आचार्य प्रशांत ने कहा कि “हम हारेंगे, बार-बार हारेंगे, लेकिन असफलता को समझना ही असली शिक्षा है। हार को अंत मान लेना सबसे बड़ी भूल है।”
उन्होंने शिक्षा में ‘विद्या’ और ‘अविद्या’ के संतुलन को जरूरी बताया और कहा कि अध्ययन को केवल बोझ मानना नहीं चाहिए, बल्कि समझने की प्रक्रिया बनाना आवश्यक है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर अपने दृष्टिकोण में उन्होंने चेताया कि तकनीक स्वयं समस्या नहीं है, बल्कि उसका उपयोग करने वाला व्यक्ति ही उसे समाज के लिए लाभकारी या हानिकारक बना सकता है।
अपने सत्र और पुस्तक स्टॉल्स पर संवाद के माध्यम से आचार्य प्रशांत ने श्रोताओं को स्वयं से प्रश्न करने, अपने भीतर के भ्रमों को पहचानने और जिम्मेदारी तथा चेतना की समझ विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उनका यह सत्र केवल साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मबोध और जीवन दृष्टि पर केंद्रित गंभीर संवाद साबित हुआ।
