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June 8, 2026

एआई कानूनी दस्तावेजों को तेजी से प्रोसेस कर सकता है। लेकिन यह कभी भी इंसानी विवेक, सहानुभूति और नैतिक समझ की जगह नहीं ले सकता: सीजेआई सूर्यकांत,

Delhi 07 Jun 2026,

भारत के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत 4 जून से 10 जून 2026 तक यूनाइटेड किंगडम के दौरे पर हैं। सीजेआई सूर्यकांत ने दौरे के दौरान ऑक्सफोर्ड यूनियन और यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन दोनों जगह महत्वपूर्ण भाषण दिए। ऑक्सफोर्ड यूनियन में उनके भाषण का मुख्य विषय ‘डिजिटल वास्तविकता के लिए संवैधानिक वादा’ और ‘एआई और तकनीकी प्रगति के युग में न्याय की रक्षा’ था।

सीजेआई सूर्यकांत ने भारतीय न्यायपालिका के तकनीकी परिवर्तन (डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन) का श्रेय युवा वकीलों और न्यायिक अधिकारियों को दिया। उन्होंने कहा कि भारत के युवा नए बदलावों को बहुत तेजी से अपना रहे हैं। युवा भारतीय न्यायपालिका के लिए इन सभी सुधारात्मक परिवर्तनों को लाने के लिए वास्तव में एक प्रेरणादायक स्रोत बने हैं। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एआई और मानवीय निर्णय को परिभाषित करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई कानूनी दस्तावेजों को तेजी से प्रोसेस कर सकता है। लेकिन यह कभी भी इंसानी विवेक, सहानुभूति और नैतिक समझ की जगह नहीं ले सकता। तकनीक को हमेशा संवैधानिक मूल्यों के अधीन रहना चाहिए। मास्टर ऑफ द रोस्टर के बारे में एक सवाल के जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि सीजेआई का ‘मास्टर ऑफ द रोस्टर’ होना अक्सर गलत समझा जाता है। उन्होंने कहा कि मामलों का आवंटन ऑटोमेशन (तकनीक) और पहले से तय नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से होता है, न कि व्यक्तिगत इच्छा से। उन्होंने न्यायपालिका और बार काउंसिल में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया और सरकारी काउंसिल नियुक्तियों में महिलाओं को 50 फीसदी प्रतिनिधित्व देने की बात कही।

यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन दौरे के दौरान बर्कबेक कॉलेज में जब वह एआई पर व्याख्यान दे रहे थे। इस दौरान भारत में असहमति (डिसेंट) को लेकर हुए सवाल-जवाब सत्र में कुछ व्यवधान भी उत्पन्न हुआ था। एक महिला/श्रोता ने भारत में “असहमति की आवाज दबाने और बढ़ती असहिष्णुता” को लेकर सवाल पूछने का प्रयास किया। कार्यक्रम के मॉडरेटर ने महिला को बीच में ही रोक दिया और कहा कि यह सवाल विषय (एआई और अंतर्राष्ट्रीय कानून) से अलग है। इसलिए इसका जवाब नहीं दिया जा सकता।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने एक बयान जारी कर दर्शकों के इस व्यवहार को “अशोभनीय” और सार्वजनिक चर्चा के नियमों के खिलाफ बताया।

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