‘कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष’ पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार, कोटद्वार का बढ़ा गौरव
विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूडी भूषण और वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक मनोज ईष्टवाल ने माल गोदाम रोड स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में ‘कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष’ पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार मिलने की जानकारी साझा की। उन्होंने इसे कण्वाश्रम, कोटद्वार और पूरे उत्तराखंड के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने बताया कि बीते 19 जुलाई को कण्व नगरी कोटद्वार में पुस्तक का लोकार्पण किया गया था। लोकार्पण के महज एक माह के भीतर ही पुस्तक ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स एवं मेंबर्स ऑफ इंटरनेशनल पब्लिशर्स एसोसिएशन, जिनेवा की ओर से आयोजित 46वें पुरस्कार समारोह में पुस्तक को आर्ट एवं कॉफी टेबल बुक (C.B.T.) श्रेणी में देशभर में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद कण्वाश्रम पर आधारित किसी कॉफी टेबल बुक को पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार मिला है। पुस्तक का प्रकाशन ‘किताब वाले’, नई दिल्ली ने किया है। पुस्तक की विषयवस्तु, शोध, प्रस्तुति और प्रकाशन गुणवत्ता को देखते हुए ज्यूरी ने करीब 5,000 पुस्तकों में से ‘कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष’ को प्रथम पुरस्कार के लिए चुना।
दशकों के शोध का मिला सम्मान
पुस्तक के लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार मनोज ईष्टवाल ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1989 से कण्वाश्रम के विषय पर कार्य शुरू किया था। वर्ष 1992 में कण्वाश्रम पर डॉक्यूमेंट्री बनाने का काम शुरू किया, जिसे वर्ष 1995 में ‘शकुंतला’ नृत्य-नाटिका के रूप में दूरदर्शन लखनऊ और दिल्ली से प्रसारित किया गया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1988 में ‘फाउंडर ऑफ गढ़वाल राइफल्स’ पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने के दौरान उन्हें कण्वाश्रम के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर काम करने की प्रेरणा मिली। इसके बाद से वे लगातार कण्वाश्रम को लेकर शोध और लेखन करते रहे। उन्होंने कहा कि वर्षों के इसी शोध और प्रयास का परिणाम है कि उनकी पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
मनोज ईष्टवाल ने इस महत्वपूर्ण शोध कार्य को कॉफी टेबल बुक के रूप में देश के सामने लाने में सहयोग के लिए विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कण्वाश्रम केवल कोटद्वार की पहचान नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और परंपरा से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर है।
राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि
ऋतु खण्डूडी भूषण ने कहा कि कण्वाश्रम की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना सभी की जिम्मेदारी है। ‘कण्वाश्रम–भरत से भारतवर्ष’ को मिला प्रतिष्ठित सम्मान इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने लेखक मनोज ईष्टवाल को बधाई देते हुए कहा कि उनके दशकों लंबे शोध और समर्पण को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना पूरे कोटद्वार और उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने कहा कि कण्वाश्रम से भरत और भरत से भारतवर्ष तक की गौरवशाली यात्रा को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने में यह पुस्तक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में भी सहायक होगी।
