September 7, 2026

हिमालय दिवस पर धामी का बड़ा ऐलान, हिमालय संरक्षण के लिए ₹1 करोड़

Himalaya Diwa

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में हिमालय दिवस के अवसर पर आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हिमालय परिषद में मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों के विस्तार के लिए ₹1 करोड़ की धनराशि देने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने हिमालय संरक्षण, संवर्धन और सतत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और हिमालयी क्षेत्रों के लिए समर्पित विशिष्ट व्यक्तित्वों को ‘हिमालय विभूति सम्मान’ प्रदान करने की भी घोषणा की। यह सम्मान हर वर्ष हिमालय दिवस के अवसर पर दिया जाएगा।

विज्ञान एवं तकनीक से जुड़े पोस्टर जारी

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े पांच पोस्टरों का विमोचन किया। इनमें 7वां देहरादून इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल, साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग, सीमांत बाल विज्ञान कांग्रेस, ज्ञानोत्कर्ष और 21वीं उत्तराखंड राज्य साइंस कॉन्फ्रेंस शामिल हैं।

उन्होंने विज्ञान के लोकप्रियकरण पर केंद्रित पत्रिका ‘विज्ञान संप्रेषण’ के पांचवें वार्षिकांक का भी विमोचन किया।

हिमालय हमारी पहचान और अस्तित्व का आधार: धामी

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय केवल पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान, संस्कृति और अस्तित्व का आधार है। हिमालय से गंगा और यमुना सहित अनेक जीवनदायिनी नदियों का उद्गम होता है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का असर हिमालयी क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

ग्लेशियरों पर बढ़ता दबाव, पारंपरिक जल स्रोतों का संकट, अतिवृष्टि, भूस्खलन, वनाग्नि और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाएं हिमालय के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। ऐसे में विकास कार्यों में विज्ञान, तकनीक, सुरक्षा और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

‘इकोलॉजी और इकोनॉमी’ के संतुलन पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में विकास का मॉडल राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप होना चाहिए। सड़क भी बने और जंगल भी बचें, रोजगार बढ़े और नदियां निर्मल रहें, पर्यटन बढ़े लेकिन पहाड़ों की धारण क्षमता का भी ध्यान रखा जाए।

उन्होंने कहा कि हिमालय संरक्षण और पहाड़ की समृद्धि एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। स्थानीय उत्पादों को बाजार, प्राकृतिक खेती, पर्यावरण अनुकूल पर्यटन और मातृशक्ति के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं और पलायन को कम किया जा सकता है।

जनभागीदारी से बनेगा हिमालय संरक्षण का आंदोलन

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जन-जन का आंदोलन बनाना होगा। इसी उद्देश्य से 2 सितंबर के बुग्याल दिवस से 9 सितंबर के हिमालय दिवस तक पूरे सप्ताह को ‘हिमालय दिवस सप्ताह’ के रूप में मनाने की शुरुआत की गई है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड हिमालय संरक्षण के विषय में केवल अपनी चिंता व्यक्त करने वाला राज्य नहीं, बल्कि पूरे देश को दिशा देने वाला राज्य बने। इसके लिए पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़कर हिमालयी क्षेत्रों की चुनौतियों के टिकाऊ समाधान तलाशने होंगे।

मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिशन लाइफ’ के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि पानी और बिजली की बचत, प्लास्टिक का कम इस्तेमाल, स्वच्छता, स्थानीय उत्पादों को अपनाना और प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार जैसे छोटे प्रयास मिलकर बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

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