मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आदेशों पर चुनाव आयोग के अंदर मतभेद: कांग्रेस ने बताया देशद्रोह
Delhi 23 September 2026,
विशेष गहन पुनरीक्षण एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आदेशों पर चुनाव आयोग के अंदर मतभेद होने की खबर मीडिया में सार्वजनिक होने से मुख्य चुनाव आयुक्त विपक्षी दलों के निशाने पर आ गए हैं। सभी विपक्षी दलों ने हमलावर होते हुए संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग पर सवाल उठाए है। वही इस मामले में चुनाव आयोग के हवाले से सफाई भी दी गई है।
मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा एसआई आर से जुड़े कुछ फैसलों और आदेशों से दो अन्य चुनाव आयुक्त असहमत थे। नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों आयुक्तों ने कई बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इन आपत्तियों में एसआईआर के अलावा फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने जैसे अनेक मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों आयुक्तों ने कुछ मामलों में सवाल उठाया कि फैसले और आदेश उनकी जानकारी के बिना कैसे जारी किए गए।
मुख्य चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को राजद्रोह बताते हुए कांग्रेस सांसद राहुलई गांधी ने ‘ अपने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि वोट की चोरी भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे अंजाम देने वाले बीजेपी, आरएसएस और इलेक्शन कमीशन ने देशद्रोह का काम किया है। इंसाफ जरूर होगा। उन्होंने कहा, “मैं इलेक्शन कमीशन और इलेक्शन ऑफिसर्स को साफ कह रहा हूं, आप जो कर रहे हो, गलत कर रहे हो… ये देश के खिलाफ है। ये मत भूलिए टाइम आएगा, हम आपको पकड़ेंगे। ये राजद्रोह है।
चुनाव आयोग को लेकर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ज्ञानेश कुमार कथित तौर पर चुनाव आयोग को अकेले चला रहे थे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग तीन सदस्यों वाली संवैधानिक संस्था है और मुख्य चुनाव आयुक्त समेत तीनों सदस्यों को मिलकर फैसले लेने होते हैं। उन्होंने कहा”हम मांग करते हैं कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाए। पिछले कुछ वर्षों में हुए सभी चुनाव रद्द किए जाएं और दोबारा चुनाव कराए जाएं।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, “जब चुनाव आयोग के अधिकारी इस तरह से काम करते हैं। तो कोई भी सोच सकता है कि चुनाव आयोग किसके इशारे पर काम कर रहा था। यह हमारे लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह है। यह उसे कमजोर करने की कोशिश है। जो संस्था निष्पक्ष होनी चाहिए थी, वह अब वैसी नहीं रही… सत्ता में बने रहने के लिए कौन इस तरह से एक संवैधानिक संस्था के साथ छेड़छाड़ कर रहा है? इसका मतलब है कि इस दौरान बनी सरकारें असंवैधानिक हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सिर्फ देश को ही भ्रमित नहीं किया, उन्होंने अपने सहयोगियों को भी भ्रमित किया। उन्होंने इलेक्शन कमीशन को हाइजैक कर लिया।
भारत निर्वाचन आयोग ने मीडिया की खबरों का खंडन किया है। आयोगु के मुताबिक, एसआईआर छचंचंघ्घघ्घंघं से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और आयोग में किसी तरह का मतभेद नहीं है। आयोग के सूत्रों ने बुधवार को कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी से सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। मुख्य सचिव निउउउर्वाचन सूत्रों के मुताबिक, हालांकि किसी भी मुद्दे पर चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की व्यक्तिगत राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन एसआईआरआर। लिए गए हैं और इनमें दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की सहमति रही है।
