26 साल बाद भी कई गांव सड़क से दूर, वन स्वीकृति बनी बड़ी चुनौती
उत्तराखंड राज्य गठन के करीब 26 साल बाद भी प्रदेश के कई गांव सड़क सुविधा से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं। दुर्गम क्षेत्रों में कम आबादी और वन भूमि से जुड़े मामलों के चलते कई गांवों तक सड़क पहुंचाने में लगातार चुनौती बनी हुई है। सरकार का कहना है कि ऐसे गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए राज्य योजना के तहत प्रयास किए जा रहे हैं।
ग्राम्य विकास मंत्री भरत चौधरी ने कहा कि सरकार प्रदेश के सभी गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत ढाई सौ या उससे अधिक आबादी वाले गांवों को प्राथमिकता दी जाती है। वहीं, पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में ऐसे कई गांव हैं, जहां आबादी महज 20 से 30 लोगों के आसपास है।
कम आबादी वाले गांवों को राज्य योजना से जोड़ने का प्रयास
मंत्री ने कहा कि कम आबादी के कारण जो गांव प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मानकों में नहीं आ पा रहे हैं, उन्हें राज्य योजना के माध्यम से सड़क से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध हो।
8-9 साल तक लग रहा वन स्वीकृति में समय
भरत चौधरी ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए वन भूमि से जुड़े मामलों में वन स्वीकृति एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई मामलों में स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होने में 8 से 9 साल तक का समय लग जाता है। इसके चलते सड़क परियोजनाओं के निर्माण में देरी होती है।
उन्होंने कहा कि वन स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल और तेज करने के लिए वन विभाग के साथ बातचीत की जा रही है, ताकि सड़क निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं को जल्द मंजूरी मिल सके।
आबादी कम हो, फिर भी गांव तक सड़क पहुंचाने का प्रयास
मंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि आबादी कितनी भी कम हो, प्रदेश के हर गांव तक सड़क सुविधा पहुंचाई जाए। दूरस्थ और कम आबादी वाले गांवों को राज्य की योजनाओं के माध्यम से सड़क नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
भरत चौधरी, ग्राम्य विकास मंत्री, उत्तराखंड सरकार
