September 26, 2026

उत्तराखंड में लंपी रोग का बढ़ा खतरा, 7 जिलों में 635 संदिग्ध मामले; 21 में संक्रमण की पुष्टि

Cows

उत्तराखंड में पशुओं में फैलने वाले लंपी त्वचा रोग (Lumpy Skin Disease) ने पशुपालन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश के सात जिलों में अब तक 635 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। जांच के लिए भेजे गए नमूनों में संक्रमण की पुष्टि भी हुई है। वहीं, नैनीताल में बीमारी के चलते एक बछड़े की मौत के बाद विभाग ने निगरानी और रोकथाम के उपाय और तेज कर दिए हैं।

269 नमूने जांच के लिए भेजे गए

लंपी रोग की दस्तक के बाद पशुपालन विभाग ने देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग और टिहरी जिलों में निगरानी बढ़ाई है। विभागीय जानकारी के अनुसार सामने आए 635 संदिग्ध मामलों में से 269 नमूने जांच के लिए बरेली भेजे गए। इनमें से प्राप्त 55 रिपोर्टों में 21 नमूनों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। नैनीताल में बीमारी से एक बछड़े की मौत भी दर्ज की गई है।

गाय और भैंसों को प्रभावित करता है रोग

लंपी त्वचा रोग मुख्य रूप से गाय और भैंसों को प्रभावित करने वाला वायरल रोग है। संक्रमित पशुओं में बुखार, त्वचा पर गांठें और अन्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं। केंद्र सरकार के अनुसार इसका प्रसार मुख्य रूप से कीटों और अन्य वाहकों के जरिए होता है। सामान्य तौर पर इस बीमारी में मृत्यु दर कम रहती है, हालांकि संक्रमित पशुओं की निगरानी और समय पर उपचार जरूरी है।

2.10 लाख से ज्यादा पशुओं का टीकाकरण

बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की आवाजाही नियंत्रित करने, संक्रमित पशुओं को अलग रखने, साफ-सफाई और कीट नियंत्रण के साथ टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है। उत्तराखंड में भी बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया गया है। हालिया विभागीय जानकारी के मुताबिक 2 लाख 10 हजार से अधिक पशुओं का टीकाकरण कराया जा चुका है।

रिकवरी रेट बेहतर होने का दावा

पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के अनुसार उत्तराखंड में अन्य राज्यों की तुलना में लंपी रोग से मृत्यु दर कम और रिकवरी रेट अधिक है। उन्होंने कहा कि विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से भी पूर्व वर्षों में लंपी वायरस की रोकथाम को लेकर राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की गई थी।

पशुपालकों से सतर्क रहने की अपील

पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि पशुओं में बुखार, शरीर पर गांठ या बीमारी से जुड़े अन्य लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सालय या विभागीय अधिकारियों से संपर्क करें। विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संक्रमण को नए क्षेत्रों में फैलने से रोकने और प्रभावित पशुओं की समय पर पहचान एवं उपचार सुनिश्चित करने की है।

सौरभ बहुगुणा, पशुपालन मंत्री, उत्तराखण्ड सरकार।

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