उत्तराखंड में बिजली संकट की आहट, कम बारिश से हाइड्रो पावर उत्पादन घटा; पीक आवर्स में बढ़ी चुनौती
उत्तराखंड में कम बारिश का असर अब बिजली उत्पादन पर भी दिखाई देने लगा है। नदियों का डिस्चार्ज घटने से राज्य की जल विद्युत परियोजनाओं में उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही केंद्रीय जल विद्युत परियोजनाओं और पूल से मिलने वाली बिजली में भी कमी आई है। बिजली की बढ़ती मांग और घटती उपलब्धता के बीच ऊर्जा विभाग ने पीक आवर्स में संभावित कमी से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं।
नदियों का डिस्चार्ज घटने से हाइड्रो पावर प्रभावित
प्रदेश में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ रहा है। ऊर्जा विभाग के मुताबिक बिजली उत्पादन में कमी का प्रमुख कारण नदियों में पानी का डिस्चार्ज कम होना है। इसका सीधा असर राज्य और केंद्रीय जल विद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली बिजली पर पड़ा है। इसके अलावा पूल से मिलने वाली थर्मल पावर में भी कमी दर्ज की गई है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 की तुलना में 2025-26 में बिजली उत्पादन में कमी आई है। मौजूदा उत्पादन करीब 715 मेगावाट के आसपास रह गया है। वहीं राज्य और केंद्रीय जल विद्युत परियोजनाओं से औसतन करीब 250 मेगावाट बिजली उत्पादन की कमी सामने आई है।
पीसी ध्यानी, एमडी यूपीसीएल ।।
3500 मेगावाट तक पहुंच रही बिजली की मांग
बिजली उत्पादन में कमी का सबसे ज्यादा असर पीक आवर्स में दिखाई दे रहा है। इस दौरान प्रदेश में बिजली की मांग करीब 3500 मेगावाट तक पहुंच रही है। मांग के मुकाबले उपलब्धता कम होने की स्थिति में ऊर्जा विभाग के सामने निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है।
बिजली खरीद और वैकल्पिक व्यवस्था पर जोर
स्थिति को देखते हुए पावर सेक्रेटरी ने यूपीसीएल और संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में संभावित विद्युत कमी से निपटने, आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और पीक आवर्स में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।
अधिकारियों को वैकल्पिक व्यवस्थाएं तैयार रखने के साथ जरूरत के अनुसार बिजली खरीद और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के निर्देश दिए गए हैं। एनआरएलडीसी की अनुमति के आधार पर पीक आवर्स में अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
बारिश पर टिकी हाइड्रो पावर की स्थिति
ऊर्जा विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में बारिश और नदियों के डिस्चार्ज के आधार पर जल विद्युत उत्पादन में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में विभाग ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था को लेकर अपनी तैयारियां बढ़ा दी हैं।
फिलहाल ऊर्जा विभाग का फोकस पीक आवर्स में बिजली की उपलब्धता बनाए रखने, संभावित कमी की स्थिति में वैकल्पिक इंतजाम करने और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है।
पीसी ध्यानी, एमडी यूपीसीएल ।।
