ईरान और अमेरिका के बीच 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत के लिए शांति समझौता
Delhi 20 Jun 2026,
ईरान और अमेरिका के बीच 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत के लिए एक शांति समझौता हुआ है। इसके तहत अमेरिका ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाएगा और ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बहाल करेगा। हालांकि, जहाजों की कतारों के कारण जाम जैसी स्थिति बन गई है, जिसके चलते पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीसीएसए) ने 48 घंटे पहले ट्रांजिट रिक्वेस्ट जमा करने जैसे सख्त नियम लागू किए हैं। विशेष दूत स्टीव विटकॉफ स्विट्जरलैंड में संभावित परमाणु समझौते पर बातचीत के लिए रवाना हुए हैं। ईरान ने नए नियमों के तहत विशेष बीमा और पूर्व अनुमति प्रक्रिया का पालन करने को कहा है, लेकिन फिलहाल 60 दिनों की छूट अवधि में शुल्क माफ हैं।
अमेरिका-ईरान समझौते के प्रमुख बिंदु:
अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते के अनुसार दोनों पक्ष सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकने, एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करने और 60 दिन में एक अंतिम समझौते पर बातचीत करने के लिए सहमत हैं। समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर खोलने और समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है. ईरान ने सुरक्षित नौवहन में सहयोग का आश्वासन दिया है, जबकि अमेरिका ईरान पर लगाई गई पाबंदियों में चरणबद्ध ढील देने और जब्त की गई ईरानी परिसंपत्तियों को मुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है. ईरान ने परमाणु हथियार विकसित न करने के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई है. वह अपने संवर्धित यूरेनियम और निगरानी व्यवस्था पर आगे की वार्ता के लिए सहमति है. समझौते में संयुक्त निगरानी तंत्र की स्थापना, क्षेत्रीय तनाव कम करने और ईरान के आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी उल्लेख है. यदि इन प्रावधानों को सफलतापूर्वक लागू किया जाता है, तो यह समझौता पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
अमेरिका और ईरान में हुई डील के बाद अब होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का निकलना शुरू हो गया है। हालांकि इतने ज्यादा जहाज कतार में थे कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर जाम जैसी स्थिति बन गई है।
पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीसीएसए) ने जहाजों को बिना किसी असुविधा को होर्मुज से पास करवाने के लिए कुछ सख्त नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत जहाज की तरफ से कम से कम 48 घंटे पहले ट्रांजिट रिक्वेस्ट जमा करनी होगी। इसके बाद भी जहाज का संपर्क अथॉरिटी से लगातार बना रहना चाहिए। अगर इसमें किसी तरह की चूक होती है तो इसकी जिम्मेदारी जहाज के मालिक की होगी। पीजीएसए ने अपनी वेबसाइट के माध्यम से ट्रांजिट रिक्वेस्ट जमा करने की सुविधा दी है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है महत्वपूर्ण?
बता दें कि होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है। अमेरिका के हमले के बाद मार्च से ही यह सामान्य आवाजाही के लिए बंद था। बेहद कम जहाजों को यहां से निकलने की अनुमति दी जाती थी। इसके बाद भी जहाजों पर हमले का खतरा बना रहता था। इसी जलमार्ग से खाड़ी देशों के लगभग 80 फीसदी तेल और गैस का निर्यात होता है। चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया के लिए यह मार्ग बेहद अहम है। भारत भी अपनी कच्चे तेल की कुल आवश्यकता का करीब 40 फीसदी आयात इसी मार्ग से करता आ रहा है।होर्मुज स्ट्रेट के बाधित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई है।
पीजीएसए के मुताबिक ट्रांजिट ऐप्लिकेशन में यात्रा की पूरी जानकारी, रूट, संपर्क और शिप के बार में सारी जानकारी देनी होगी। इसके बाद ही इसे होर्मजु से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। अथॉरिटी की तरफ से कहा गया है कि होर्मुज के पास पहुंचने से पहले ही जहाजों को अपनी रिक्वेस्ट भेज देनी चाहिए। पीजीएसए ने कहा कि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और किसी भी तरह की दुर्घटना को टालने के लिए यह प्रक्रिया लागू की गई है। बता दें कि युद्ध के दौरान होर्मजु स्ट्रेट में भी माइन्स बिछा दी गई थीं। इसलिए दुर्घटना संभावित क्षेत्र से जहाजों को गुजरने नहीं दिया जा सकता।
60 दिनों तक नहीं लगेगा कोई शुल्क:
समझौते के मुताबिक 60 दिनों तक ईरान जहाजों को पास कराने के बदले किसी भी तरह का शुल्क वसूल नहीं करेगा। स्ट्रेट से व्यापारिक जहाजों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा, पर्यावरण संबंधित भी कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। रखरखाव संबंधित सारे खर्च ईरान की सरकार वहन करेगी।
गुरुवार को होर्मुस स्ट्रेट से होकर कम से कम 25 जहाज निकले। वहीं अप्रैल महीने में 7 से 8 जहाज ही होर्मुज से पास हो पाए थे। अमेरिकी हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का निकलना बेहद कम हो गया था।
