गोल्डन कार्ड योजना के लिए अनुपूरक बजट में ₹125 करोड़ का प्रावधान, कर्मचारी परिषद ने जताया आभार
उत्तराखंड में गोल्डन कार्ड स्वास्थ्य योजना के सुचारू संचालन और चिकित्सा बिलों के भुगतान की समस्या के समाधान की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में गोल्डन कार्ड योजना के लिए 125 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राज्य संयुक्त कर्मचारी परिषद उत्तराखंड ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे कार्मिकों, पेंशनरों और उनके आश्रितों के हित में सकारात्मक शुरुआत बताया है।
परिषद के अध्यक्ष अरुण पांडे ने कहा कि गोल्डन कार्ड योजना के लिए राज्य सरकार की ओर से बजट प्रावधान किए जाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी। परिषद लगातार यह मांग कर रही थी कि कार्मिकों के अंशदान के साथ राज्य सरकार भी योजना के संचालन के लिए बजट उपलब्ध कराए। परिषद के प्रयासों के बाद अनुपूरक बजट में 125 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाना स्वागतयोग्य कदम है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में किया गया बजट प्रावधान योजना की आवश्यकताओं की तुलना में कम है, लेकिन इसे एक अच्छी शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए। उम्मीद है कि भविष्य में सरकार आवश्यकता के अनुसार बजट बढ़ाएगी, जिससे प्रदेश के कार्मिकों, पेंशनरों और उनके आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
अरुण पांडे ने कहा कि परिषद के लगातार प्रयासों के बाद ही गोल्डन कार्ड योजना लागू हुई थी। इसके माध्यम से प्रदेश के कार्मिकों को भर्ती होने की स्थिति में कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल रहा था। हालांकि, धनराशि की कमी और अन्य कारणों से योजना के संचालन में परेशानियां सामने आ रही थीं। चिकित्सा बिलों के भुगतान में भी दिक्कतें हो रही थीं।
उन्होंने कहा कि परिषद और अन्य कर्मचारी संगठनों की ओर से लगातार किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप सरकार ने योजना के लिए अपना अंशदान उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इससे योजना का संचालन सुचारू बनाने और चिकित्सा बिलों के भुगतान से जुड़ी समस्याओं के समाधान में मदद मिलने की उम्मीद है।
परिषद अध्यक्ष ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री का विशेष आभार व्यक्त किया। साथ ही, मांग के समाधान की दिशा में सहयोग और आश्वासन देने के लिए स्वास्थ्य मंत्री तथा सचिव, स्वास्थ्य का भी धन्यवाद किया।
अरुण पांडे ने कहा कि गोल्डन कार्ड योजना के लिए बजट प्रावधान प्रदेश के कर्मचारी संगठनों के लंबे संघर्ष और एकजुटता का सकारात्मक परिणाम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार भविष्य में भी कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए योजना के बजट में आवश्यक वृद्धि करेगी, ताकि कार्मिकों, पेंशनरों और उनके आश्रितों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।
