हरिद्वार में रामकथा का समापन, मुख्यमंत्री धामी ने संतों से लिया आशीर्वाद
देवभूमि हरिद्वार स्थित प्रेम नगर आश्रम में पूज्य मोरारी बापू के श्रीमुख से प्रवाहित 980वीं श्रीराम कथा का समापन गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। कथा के समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने रामकथा का श्रवण कर भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
कथा के समापन समारोह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहुंचकर पूज्य मोरारी बापू से आशीर्वाद प्राप्त किया और रामकथा का श्रवण किया। इस दौरान परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर सतुआ बाबा और आचार्य लोकेश मुनि सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।
पूज्य मोरारी बापू ने श्रीराम कथा के माध्यम से भगवान श्रीराम के दिव्य चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीराम का जीवन समरसता, करुणा, सत्य, मर्यादा, प्रेम और सेवा का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि रामकथा का उद्देश्य केवल कथा सुनना नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। जब व्यक्ति के मन में राम बसते हैं तो उसके व्यवहार में करुणा, परिवार में प्रेम, समाज में विश्वास और राष्ट्र में नैतिकता का प्रकाश फैलता है।
परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि श्रीराम केवल एक नाम नहीं, बल्कि भारत की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि राम जीवन की मर्यादा, राष्ट्र की संस्कृति और मानवता की चेतना के प्रतीक हैं। यदि प्रत्येक भारतीय अपने जीवन में श्रीराम के सत्य, सेवा, समरसता और मर्यादा के आदर्शों को अपनाए, तो भारत विश्व को शांति, सह-अस्तित्व और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का मार्ग दिखाने वाला विश्वगुरु बन सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संत समाज को नमन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के संरक्षण तथा राष्ट्र निर्माण में संतों का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें कई अवसरों पर पूज्य मोरारी बापू का सान्निध्य प्राप्त हुआ है और हर बार उनके विचारों से नई ऊर्जा और प्रेरणा मिली है।
कार्यक्रम के दौरान स्वामी चिदानंद सरस्वती ने पूज्य मोरारी बापू का उत्तराखंड की पावन भूमि पर अभिनंदन करते हुए उन्हें रुद्राक्ष का दिव्य पौधा और भगवान शिव की प्रतिमा भेंट की। कथा के समापन के साथ ही श्रद्धालुओं ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त कर राष्ट्र, समाज और मानवता के कल्याण की कामना की।
