18 वर्षों की साधना के बाद पूरा हुआ गुरु ग्रंथ साहिब का संस्कृत अनुवाद, लोक भवन में भव्य समारोह
उत्तराखंड लोक भवन में आज श्री गुरु ग्रंथ साहिब का संस्कृत पद्यानुवादक में अनुवाद का विमोचन ,इस गोल्डन जुब्ली सेलिब्रेशन कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट गुरमीत सिंह ने शिरकत की ।साथ ही कार्यक्रम में शुरुआत दीप प्रज्वलित कर की गई।
इस विषय पर बात करते हुए उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा उत्तराखंड के लोक भवन में आज एक ऐतिहासिक और सौभाग्य का क्षण देखा गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने ‘आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी’ के संस्कृत पद्यानुवाद के सफल समापन पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है। इस पावन ग्रंथ का यह विशेष अनुवाद सहारनपुर के ‘राम तीर्थ केंद्र’ द्वारा तैयार किया गया है।
मीडिया को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत भारत की सबसे प्राचीन, गहरी और ज्ञानमयी भाषा है। इस भाषा में गुरु ग्रंथ साहिब जी का अनुवाद होना एक अद्भुत और सराहनीय कार्य है। उन्होंने बताया कि यह पुनीत कार्य साल 2008 में डॉ. केदारनाथ स्वामी जी की प्रेरणा से शुरू हुआ था, जो अथक प्रयासों के बाद अब साल 2026 में जाकर पूरी तरह संपन्न हुआ है।
राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि गुरुओं का यह पावन और कल्याणकारी संदेश देश की 144 करोड़ जनता सहित दुनिया के सभी 8 अरब लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने सिख धर्म के मूल शब्द ‘सिख’ यानी ‘सीखने’ (Learning) पर प्रकाश डालते हुए इस अनुवाद को पूरी मानवता के लिए एक महान योगदान बताया।
लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह राज्यपाल उत्तराखंड।
वही इस विषय पर बात करते हुए सहारनपुर के राम तीर्थ केंद्र के अध्यक्ष सर्वेश्वर नाथ प्रभाकर ने कहा आज का पल एक अत्यंत हर्ष का पर्व है। हमारे परिवार ने श्री गुरु ग्रंथ को संस्कृत में अनुवाद करने का कार्य सफल रूप से पूरा किया।… और इस कार्य को करने में हमें कई वर्ष लगे।
सिद्धेश्वर प्रभाकर अध्यक्ष राम तीरथ सहारनपुर।
