चीनी की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट; खुदरा कीमतों में भी कमी का रूख शुरू, Mill sugar prices fall by nearly
Delhi 28 गस्त 24026,4
सरकार ने घरेलू बाजार में छीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपूर्ति में कृत्रिम कमी पैदा होने से रोकने के लिए कई सक्रिय उपाय किए हैं। हाल के दिनों में मिल-द्वार चीनी की में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि खुदरा चीनी की कीमतों में भी कमी आना शुरू हो गयी है। आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से कीमतों में होने वाले बदलावों के सामान्य हस्तांतरण को देखते हुए खुदरा कीमतों में भी शीघ्र ही मिल-द्वार कीमतों में आई गिरावट के सक्रिय उपाय कर रही है कि पर्याप्त उपलब्धता का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचे। मिल-द्वार और खुदरा कीमतों में क्षमगिरावट का रूख दर्शता है कि हाल में कीमतों में हुई तेज वृद्धि मुख्य रूप से जमाखोरी और सट्टेबाजी के कारण थी, जबकि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
देशभर की चीनी मिलों में चीनी के भंडार के भौतिक सत्यापन के लिए चलाए गए अभियान से पर्याप्त उपलब्धता की स्थिति की पुन: पुष्टि हुई है। कई मामलों में चीनी मिलों ने उनके द्वारा को प्रस्तुत मासिक विवरणियों में घोषित मात्रा से अधिक भंडार पाया गया। इस सत्यापन के अभियान से यह स्पष्ट हुआ है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। और इसलिए घबराकर में खरीदारी करने या आवश्यकता से अधिक भंडारण करने का कोई औचित्य नहीं है। कुछ मामलों में चीनी मिलों द्वारा कम बिक्री की प्रक्रिया अपनाई जा रही थी, अर्थात उन्हें मासिक कोटे के तहत जितनी मात्रा बेचने के लिए आवंटित की गयी थी, उससे कम मात्रा में चीनी बेची जा 3। पर्याप्त भौतिक भंडार होने के बावजूद इस तरह की गतिविधियां बाजार में चीनी की आपूर्ति अनावश्यक रूप से सीमित करती हैं।
सितंबर से पखवाड़ेवार चीनी कोटा प्रणाली:
इन समस्याओं के समाधान और चीनी को समय पर बाजार तक पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने सितंबर से पखवाड़ेवार चीनी आवंटन प्रणाली शुरू करने का निर्णय लिया है। पखवाड़ेवार कोटे के तहत मिलों को आवंटित मात्रा में से कम से कम 40 प्रतिशत चीनी पहले सप्ताह में और शेष मात्रा अगले सप्ताह में बेचनी होगी। बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए आवश्यकता पढ़ने पर अतिरिक्त कोटा जारी करने में। यह लचीली व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि चीनी की आपूर्ति वास्तविक घरेलू मांग के अनुरूप बनी रहे। चीनी मिलों को पहले ही निर्देश दिया जा चुका है कि बिक्री की गई चीनी को बिक्री के तारीख से सात दिनों के भीतर मिल से भेजना सुनिश्चित करें। पखवाड़ेवार कोटा आवंटन और सात दिनों के भीतर अनिवार्य प्रेषण की संयुक्त व्यवस्था से आपूर्ति श्रृंखला में चीनी की आवाजाही में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि चीनी मिलों से तेजी से डीलरों और अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंचे। साथ ही, अनावश्यक रूप से भंडार जमा करने और सट्टा-आधारित भंडारण को हतोत्साहित करेगा। चीनी के थोक उपभोक्ताओं को भी सलाह दी गई है कि वे अपनी परिचालन संबंधी आवश्यकताओं से अधिक मात्रा चीनी का भंडारण न करें।
नए मौसम के लिए गन्ने की पेराई 15 अक्टूबर से शुरू होगी। अक्टूबर महीने दौरान 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उत्पादन होने की उम्मीद है। सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर में उत्पादित चीनी को बिना किसी प्रतिबंध के बेचने की भी अनुमति दी है, जिससे नए मौसम का उत्पादन जल्द से जल्द घरेलू बाजार में उपलब्ध हो सके। नवंबर में चीनी का उत्पादन लगभग 45 लाख मीट्रिक टन रहने की उम्मीद है, जिससे घरेलू खपत के लिए चीनी की अतिरिक्त आपूर्ति में पर्याप्त वृद्धि होगी।
मुख्य बिन्दु
हाल के दिनों में मिल-द्वार से सीधे चीनी की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आई है और कल से खुदरा कीमतों में भी गिरावट शुरू हो गई है। उम्मीद है कि खुदरा कीमतें भी शीघ्र ही मिल-द्वार कीमतों में आई गिरावट के अनुरूप कमी आएगी सरकार द्वारा किए गए भंडार सत्यापन से चीनी की पर्याप्त उपलब्धता की पुष्टि हुई है। अनेक मामलों में चीनी मिलों के पास उनके मासिक विवरणों में घोषित मात्रा से अधिक भंडार पाया गया। सितंबर से पखवाड़ेवार चीनी कोटा आवंटन प्रणाली मासिक कोटा प्रणाली का स्थान लेगी। इससे सरकार को बाजार की लगभग वास्तविक समय के आधार पर निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त कोटा जारी करने में सहायता मिलेगी।
मिलों द्वारा बेची गई चीनी को सात दिनों के भीतर भेजा जाना अनिवार्य होगा। इससे मिलों से डीलरों और घरेलू बाजार तक चीनी की तेजी से आवाजाही सुनिश्चित होगी तथा अनावश्यक रूप से भंडार जमा करने से रोका जा सकेगा।
शीघ्र गन्ना पेराई और नए मौसम का उत्पादन चीनी की उपलब्धता को उल्लेखनीय रूप से मजबूत करेगा। कर्नाटक और महाराष्ट्र में चालू मिलों से सितंबर के दौरान लगभग 2 लाख मीट्रिक टन चीनी अतिरिक्त रूप से उपलब्ध होने की उम्मीद है। अक्टूबर में 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक और नवंबर में लगभग 45 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन होने की उम्मीद है।
