सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जनता की अदालतें बनें: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत,
Delhi 31 December 2025,
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उनका प्रयास है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट जनता की अदालतें बनें। जहां कानूनी आपात स्थितियों में वर्किंग ऑवर्स के अतिरिक्त कभी भी अपील की जा सके। उन्होंने ने कहा है कि किसी नागरिक को कानूनी आपात स्थिति का सामना या जांच एजेंसियों द्वारा उसे देर रात गिरफ्तारी की धमकी दी जाती है तो वह मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए आधी रात में भी संवैधानिक अदालतों से सुनवाई की मांग कर सकेगा।
उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता यह भी है कि लंबित याचिकाओं से निपटने के लिए यथासंभव अधिक से अधिक संवैधानिक पीठों का गठन किया जाए। इन याचिकाओं में कई अहम मुद्दे उठाए गए हैं। जैसे-मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं का समूह, जो बिहार से शुरू होकर अब एक दर्जन राज्यों में चल रहा है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वे धार्मिक स्वतंत्रता, आस्था और महिलाओं के अधिकारों के बीच टकराव वाली याचिकाओं पर फैसला करने के लिए 9 न्यायाधीशों की पीठ गठित करने की व्यवहार्यता की भी जांच करेंगे। ये मामले हिंदू, मुस्लिम और पारसी समुदायाओं के हैं। इन सभी में एक तरफ धर्म, धार्मिक परंपरा और आस्था का सवाल है, तो दूसरी तरफ महिलाओं के अधिकारों और न्याय के संरक्षण की मांग है।
मुख्य न्यायाधीश ने वकीलों के लिए बहस पूरी करने हेतु सख्त समयसीमा लागू करने का निर्णय लिया है। अंबानी बंधुओं के बीच हुए समझौते के विवाद से संबंधित उस मामले जैसा दूसरा मामला कभी नहीं होगा, जिसमें वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में 26 दिनों तक बहस की थी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि गरीब वादियों को न केवल मुफ्त कानूनी सहायता मिले, बल्कि उनके मामलों की सुनवाई में उन्हें अदालत का समान समय भी मिले।
