नीट और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक मामले सुप्रीम कोर्ट हाई पावर कमेटी बनाने का फैसला किया,
Delhi 17 August 2026,
नीट और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक के विरोध में दिल्ली सहित देश भर में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी एवं उनपर दर्ज एफआईआर, प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारी महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले उठाए गए। कोर्ट ने पूरे मामले की जांच के लिए एक हाई पावर कमेटी बनाने का फैसला किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। उक्त कमेटी प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, पुलिस की कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों पुलिसकर्मियों के घायल होने के मामलों की जांच के साथ ही महिला प्रदर्शनकारियों से कथित बदसलूकी, यौन उत्पीड़न ऑनलाइन उत्पीड़न की शिकायतों एवं तथ्यों की जांच करेगी।
सुप्रीम कोर्ट सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, पूर्व डीजीपी और पूर्व सीबीआई निदेशक को शामिल करके एक उच्च स्तरीय पैनल बनाएगा। प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस एक्शन की सच्चाई सामने लाने के लिए सीसीटीवी व वीडियो फुटेज कमेटी को सौंपे जाएंगे। अदालत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को रद्द करने के संकेत दिए हैं।
सुनवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर का मुद्दा भी उठाया गया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सिर्फ छात्रों प्रदर्शनकारियों से जुड़ी एफआईआर की अलग सूची दी जाए। कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ने पर ऐसी एफआईआर को खत्म करने पर विचार किया जा सकता है. हालांकि हत्या, रेप, पास्को अपहरण जैसे गंभीर आरोपों वाले मामलों को अलग रखा जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने का मुद्दा भी सामने आया। दिल्ली पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया गया, जिसमें बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. पुलिस पर पत्थरबाजी हिंसा से जुड़े वीडियो पेश किए गए।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं से कथित बदसलूकी के आरोपों पर भी कोर्ट ने गंभीरता दिखाई।
फेस रिकग्निशन यानी चेहरा पहचानने वाली तकनीक के इस्तेमाल का मुद्दे पर सुनवाई हुई। प्रदर्शन के दौरान लोगों के चेहरों का डेटा कैसे जुटाया जा रहा है उसका इस्तेमाल किस तरह हो रहा है। निजता के अधिकार सरकार के पास इस डेटा के इस्तेमाल का कानूनी अधिकार है या नहीं, इस पर भी सवाल उठे। सरकार की तरफ से कहा गया कि फेस रिकग्निशन के जरिए हर व्यक्ति की पहचान नहीं की जाती, बल्कि गंभीर अपराधियों के रिकॉर्ड से मिलान किया जाता है।
मुख्य न्यायाधीश ने साफ किया कि हाई पावर कमेटी मुख्य रूप से तथ्यों की जांच करेगी। फेस रिकग्निशन, निगरानी, निजता अनुच्छेद 21 से जुड़े संवैधानिक कानूनी सवालों पर कमेटी केवल अपनी रिपोर्ट दे सकती है। लेकिन अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट का ही होगा। सुप्रीम कोर्ट कल कमेटी को लेकर आदेश जारी करेगा। इसके बाद कमेटी अपना काम शुरू करेगी।
