सीईसी ज्ञानेश कुमार ,एसआईआर, विपक्ष के एससी परिसर में प्रदर्शन संबंधी 22 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए नोटिस,
Delhi 15 October 2026,
आज वृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के 13 विपक्षी नेताओं की संयुक्त याचिका पर सुनवाई हुई। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने, मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण एसआईआर से करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने फाइलों और नोटिंग्स के पूर्ण खुलासे और स्वतंत्र ऑडिट की मांग की गई है। इसके साथ ही 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान कथित अवैध हिरासत, मारपीट और मेट्रो तथा रेल सेवाओं पर प्रतिबंधों के खिलाफ दायर अवमानना और अन्य याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिसमें केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करना था।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर आज चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई की। याचिकाओं में चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, फॉर्म 6 में बदलाव और एसआईआर से जुड़े फैसलों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर सभी 22 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया।
इंडिया गठबंधन के सांसदों और नेताओं द्वारा बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रदर्शन करने और नारेबाजी मामले में भी नोटिस जारी किया गया। इस मामले में दायर याचिका में कोर्ट परिसर के राजनीतिक इस्तेमाल को रोकने की मांग की गई है। इस याचिका में राहुल गांधी और विपक्ष के कुछ नेताओं को भी पक्षकार बनाया गया है।
राहुल गांधी पर गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का देने के आरोप में भी याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कोर्ट से कहा कि, लोकसभा में नेता प्रति पक्ष राहुल गांधी ने कोर्ट परिसर में गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का दिया। यह लोग उसकी बात नहीं करेंगे? इनकी सारी बातें एकपक्षीय हैं। कोर्ट इसका संज्ञान ले।
अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, हम इस महिला पत्रकार को दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण देना चाहते हैं। इस पर साॅलिसिटर जनरल मेहता ने कहा , हम उसे गिरफ्तार नहीं करेंगे, लेकिन कोर्ट जांच में सहयोग के लिए कहे। अधिवक्ता इंदिरा जय सिंह ने कहा कि पुलिस अधिकारी एसीपी विवेक भगत की ओर से जिस महिला पत्रकार के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है, उसको गिरफ्तारी से संरक्षण का आदेश दे। साॅलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि वो जांच में सहयोग करें। हम आश्वस्त करते है कि उसे अभी गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। जांच में जो भी नतीजा निकलेगा, वो कोर्ट को बताया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए कि, महिला पत्रकार को गिरफ्तार ना किया जाए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा महिला पत्रकारों पर किए गए हमले के आरोपों की सुनवाई और जांच के लिए एक समिति का गठन कर सकता है।
कोर्ट ने वकील इंदिरा जयसिंह को शिकायकर्ता महिला पत्रकारो के नाम और एसआईटी में शामिल होने के लिए रिटायर्ड जजों और पुलिस अधिकारियों के नाम मांगे है।
सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि, इंदिरा जयसिंह जिस महिला की बात कर रही हैं, वह पहले से हाई कोर्ट जा चुकी है। सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि, समस्या यह है कि आज हर कोई मोबाइल और माइक लेकर खुद को पत्रकार कह रहा है। बहुत से लोग रील बनाने के लिए आते हैं। हम हर महिला को सुरक्षा देने के पक्ष में हैं। इसमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
