ग्लोबल साउथ अब केवल फैसलों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि फैसले लेने वाला पक्ष बनना चाहिए:पीएम मोदी
Delhi दिल्ली, के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज बनने और निर्णय लेने की प्रक्रिया में हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ग्लोबल साउथ अब केवल फैसलों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि फैसले लेने वाला पक्ष बनना चाहिए। भारत ने इसके लिए हरसंभव विशेषज्ञता और सहयोग देने की पेशकश की।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने नए निवेश मंच का प्रस्ताव दिया और पश्चिमी देशों पर निशाना साधा। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक हुई। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत का ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 224 अरब डॉलर हो गया है, जिसका मुख्य कारण चीन और रूस से अधिक आयात है। शिखर सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया गया और पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती दी गई। पीएम मोदी और पुतिन ने ‘इनोप्रोम इंडिया’ प्रदर्शनी का दौरा किया और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर सहमति जताई।
सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन चीन जनवादी गणराज्य के राष्ट्रपति gशी जिनपिंग के साथ मुलाकात की। दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई अपनी पिछली बैठक के बाद से भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में हुई निरंतर प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने दोहराया कि दोनों देशों को अपने संबंधों के प्रति रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। मतभेदों को विवादों का रूप नहीं लेना चाहिए। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि दोनों पक्षों को तीन पारस्परिकताओं—पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक संवेदनशीलता और पारस्परिक हित—से मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास का एक आवश्यक आधार बनी हुई है। उन्होंने सीमा से संबंधित मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और सहमतियों का दोनों पक्षों द्वारा पालन किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों नेताओं ने अपने समग्र द्विपक्षीय संबंधों के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा प्रश्न के निष्पक्ष, तर्कसंगत और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, इस वर्ष की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक पड़ाव है। हम ब्रिक्स की बीसवीं वर्षगांठ मना रहे हैं। मानव जीवन में बीस वर्ष की आयु, मेच्योरिटी और रिस्पांसिबिलिटी के नए चरण का आरंभ होती है। यह वह अवस्था होती है, जब सपनों के साथ जिम्मेदारियाँ जुड़ती हैं, सामर्थ्य को नई दिशा मिलती है।
पिछले बीस वर्षों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। हम एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और कंसेंसस से आगे बढ़ते हैं। हम किसी के विरुद्ध नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर चलने की सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं।
