February 3, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशंस रेगुलेशंस 2026’ को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया,

Delhi 29 January 2026,

उच्च शिक्षा संस्थानों को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के “यूजीसी रेगुलेशंस-2026′ के नए नियमों को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है। जिसमें आरोप लगाया गया कि ये नियम सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण हैं। और उनके मौलिक अधिकारों का हनन करने वाले हैं। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि यूजीसी रेगुलेशंस-2026 के प्रावधान 3(सी) को लागू करने पर रोक लगाई जाए। इन मामलों में आज सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशंस रेगुलेशंस 2026’ को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। 19 मार्च 2026 को अगली सुनवाई की तारीख तय की है।

अधिवक्ता विनीत जिंदल याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि यह प्रावधान उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नाम पर कुछ वर्गों (खासकर सामान्य वर्ग) के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देता है और इससे कुछ समूहों को शिक्षा से बाहर किया जा सकता है। याचिका में कहा गया कि नियम 3(सी) संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। साथ ही, यह यूजीसी अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के विपरीत है और उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने के मूल उद्देश्य को नुकसान पहुंचाता है।

बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026’ लागू किया। यूजीसी के नए नियमों का उद्देश्य कैंपस पर जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान, विकलांगता आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करना है। इन नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों (विश्वविद्यालयों और कॉलेजों) में इक्विटी कमेटी गठित करने का प्रावधान है, जो शिकायतों की जांच करेगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई (जैसे डिग्री रोकना, संस्थान की मान्यता रद्द करना आदि) कर सकेगी।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली दो जज की बेंच ने यूजीसी के ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशंस रेगुलेशंस 2026’ को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। यह मामला देशभर के छात्रों से जुड़ा है और इसमें जल्द फैसला जरूरी है, इसलिए तत्काल सुनवाई पर सहमति जताई गई।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा, ‘इस गाइडलाइंस दखल नहीं दिया तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इससे समाज में बंटवारे की स्थिति होगी और उसके परिणाम खतरनाक होंगे। हमें लगता है कि इन रेगुलेशंस की भाषा स्पष्ट नहीं है। दोनों जजों की बेंच ने समीक्षा की बात करते हुए 19 मार्च को अगली सुनवाई की तारीख तय की है।

 

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