वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में वास्तविक आधार पर जीवीए में साल दर साल 7.0 प्रतिशत की बढ़ोतरी: वित्त मंत्री सीतारमण,
Delhi 29 January 2026,
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में वास्तविक आधार पर उद्योग का संवर्धित सकल मूल्य (जीवीए) में साल दर साल 7.0 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ भारत का औद्योगिक प्रदर्शन मजबूत बना रहा। इससे पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में वृद्धि में 5.9 प्रतिशत की नरमी के बाद यह अच्छी बढ़ोतरी का संकेत है।
आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार, वित्त वर्ष 26 की पहली और दूसरी तिमाही में विनिर्माण जीवीए क्रमश: 7.72 और 9.13 प्रतिशत बढ़ा। इस सुधार की मुख्य वजह विनिर्माण क्षेत्र में जारी ढांचागत बदलाव हैं, जिनमें धीरे-धीरे मंहगे विनिर्माण खंड की ओर रुझान, कॉरिडोर आधारित विकास के माध्यम से औद्योगिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता में सुधार और प्रौद्योगिकी को बड़े स्तर पर अपनाना एवं कंपनियों का औपचारीकरण शामिल हैं।आर्थिक समीक्षा कहती है कि भारत के कुल विनिर्माण मूल्य संवर्धन में मध्यम और उच्च प्रौद्योगिकी गतिविधियों की हिस्सेदारी 46.3 प्रतिशत हो गई। इसकी मुख्य वजह उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं और भारतीय सेमीकंडटर मिशन जैसी विभिन्न सरकारी पहल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल, रसायन और परिवहन क्षेत्रों में घरेलू क्षमता में विस्तार हैं। समीक्षा में 2023 में प्रतिस्पर्धी औद्योगिक प्रदर्शन (सीआईपी) के मामले में भारत की रैंकिंग सुधरकर 37वें पायदान पर पहुंचने के साथ देश की वैश्विक स्थिति में मजबूती की बात कही गई, जबकि 2022 में भारत 40वें पायदान पर था।
आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक भले ही, वाणिज्यिक बैंकों की तरफ से बैंक आधारित औद्योगिक कर्ज में बढ़ोतरी वित्त वर्ष 24 के 9.39 प्रतिशत की तुलना में घटकर वित्त वर्ष 25 में 8.24 प्रतिशत रह गई, लेकिन विभिन्न आकलनों से वर्तमान में जारी विविधीकरण के चलते बैंकों से वित्त के स्रोतों के दूर होने के संकेत मिले हैं। अगस्त 2025 की मासिक आर्थिक समीक्षा का उल्लेख करते हुए समीक्षा कहती है, ‘बैंक कर्ज में कमी वाणिज्यिक क्षेत्र के वित्तीय संसाधनों के समग्र प्रवाह में बढोतरी से मेल खाती है। वित्त वर्ष 20 से वित्त वर्ष 25 के दौरान गैर बैंक स्रोतों से वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए वित्त के प्रवाह में 17.32 की सीएजीआर बढोतरी दर्ज की गई।
वैश्विक स्तर पर चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद, इन्फ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक, कारोबार में सुगमता और नवीन प्रणालियों में सुधार के साथ भारत का औद्योगिक क्षेत्र अच्छी तेजी का गवाह बना है। आर्थिक समीक्षा कहती है कि औद्योगीकरण के अगले दौर के लिए देश को आयात विकल्प पर आधारित मॉडल की तुलना में व्यापकता, प्रतिस्पर्धा, नावाचार और जीवीसी में व्यापक एकीकरण पर जोर देना होगा। हर खंड में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करने के बजाए, भारत को विविधीकरण के माध्यम से रणनीतिक लचीलेपन का विकास और व्यापक क्षमताएं हासिल करने की जरूरत है। इसके लिए आरएंडडी, प्रौद्योगिकी को अपनाने, कौशल और गुणवत्ता प्रणालियों में निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ाने की जरूरत है।
