यूजीसी समता विनियम-2026 मामले में णतयाचिकाकर्ताओं को भी उपलब्ध कराने के दिये निर्देश
Delhi 20 August 2-
उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियम यूजीसी समता विनियम, 2026 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी जवाब तलब किया है। आज गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निर्देश दिया कि केंद्र और यूजीसी अपना जवाब दाखिल करें तथा उसकी प्रति याचिकाकर्ताओं को भी उपलब्ध कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निश्चित की है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई इन याचिकाओं में यूजीसी के 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी नियम, 2026 के खंड 3(सी) को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नियम का खंड 3(सी) मनमाना और भेदभावपूर्ण है। यह प्रावधान कुछ वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा से बाहर करने का आधार बन सकता है। याचिका में दलील दी गई है कि यह नियम संविधान के समानता के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित नियम के विवादित प्रावधान पर अंतरिम रोक लगाते हुए केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी करते हुए मामले में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे।
याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि, उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने से संबंधित यूजीसी समता विनियम, 2026 कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव रोकने और समानता को बढ़ावा देने के लिए अधिसूचित किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यूजीसी को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल पुराने 2012 के नियम ही लागू हैं।
