September 23, 2026

फिजिक्स के लिए, जॉन क्लार्क, मिशेल एच. डेवोरेट और जॉन एममार्टिनिस को नोबेल प्राइज 2025 प्रदान किया जाएगा,

Delhi,07 October 2025,

नोबेल प्राइज इन फिजिक्स-2025: मेडिसिन के बाद अब फिजिक्स के नोबेल प्राइज का ऐलान हो गया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने जॉन क्लार्क, मिशेल एच. डेवोरेट और जॉन एम. मार्टिनिस को इलेक्ट्रिकल सर्किट में मैक्रोस्कोपिक क्वांटम मैकेनिकल टनलिंग और एनर्जी क्वानटाइजेशन की खोज के लिए 2025 का भौतिकी का नोबेल दिया है। विगत दिनों मैरी ई. ब्रुनको को फिजियोलॉजी या मेडिसिन के क्षेत्र में 2025 का नोबेल पुरस्कार दिया गया। वहीं फ्रेड रामस्डेल और शिमोन साकागुची को पेरीफेरल इम्यून टॉलरेंस से संबंधित उनकी रिसर्च के लिए प्रदान किया गया है।

पुरस्कारों की घोषणा के दौरान क्वांटम मैकेनिज्म के प्रभावों को समझाया गया, उन्होंने एक ऐसी प्रणाली में क्वांटम मैकेनिकल टनलिंग और क्वांटाइज्ड एनर्जी लेवल, दोनों का प्रदर्शन किया जो हाथ में पकड़ने लायक थी। जानकारी ये भी है कि ये खोज क्वांटम क्रिप्टोग्राफी, क्वांटम कंप्यूटर और क्वांटम सेंसर सहित क्वांटम तकनीक को और विस्तृत रूप से समझने में ज़्यादा मदद मिलेगी।खोज क्वांटम क्रिप्टोग्राफी, क्वांटम कंप्यूटर और क्वांटम सेंसर सहित क्वांटम तकनीक को और समझने में मदद करेगी। आमतौर पर क्वांटम मैकेनिक्स के नियम बहुत छोटे कणों ( इलेक्ट्रॉन) पर लागू होते हैं। इनके व्यवहार को माइक्रोस्कोपिक कहा जाता है। क्योंकि ये इतने छोटे होते हैं कि सामान्य माइक्रोस्कोप से भी दिखाई नहीं देती लेकिन अब इन वैज्ञानिकों ने पहली बार बिजली के सर्किट में “बड़े पैमाने” (मैक्रोस्कोपिक) पर क्वांटम टनलिंग और ऊर्जा के स्तरों की खोज की है।

नोबेलप्राइज डॉट ओआरजी के अनुसार 1901 से अब तक 118 वैज्ञानिकों को भौतिकी पुरस्कार प्रदान किए जा चुके हैं। इनमें सबसे कम उम्र के विजेता 25 साल के लॉरेंस ब्रैग (1915) थे तो 96 साल के आर्थर अश्किन (2018) ये सम्मान हासिल करने वाले सबसे उम्रदराज वैज्ञानिक थे।

सर सीवी रमन पहले भारतीय थे, जिन्हें इस श्रेणी में वर्ष 1930 में पुरस्कृत किया गया। उनकी खोज ने बताया था कि जब प्रकाश किसी पदार्थ से टकराता है, तो उसका रंग बदल सकता है। इसे रमन इफेक्ट कहते हैं यह खोज आज लेजर और मेडिकल तकनीकों में इस्तेमाल होती हैं, वहीं दूसरे भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर थे. इन्हें 1983 में तारों (स्टार्स) के जीवन और मृत्यु की खोज के लिए सम्मानित किया गया, उन्होंने ही बताया कि बड़े तारे अंत में ब्लैक होल बन सकते हैं।

6 अक्टूबर 2025 को मेडिसिन के लिए मैरी ई. ब्रंकॉ, फ्रेड राम्सडेल और शिमोन साकागुची को दिया गया है। इन्हें यह प्राइज पेरीफेरल इम्यून टॉलरेंस के क्षेत्र में किए गए रिसर्च के लिए दिया गया है।

नोबेल प्राइज विजेताओं को सोने का एक मेडल और सर्टिफिकेट मिलेंगे। इसके अलावा नोबेल प्राइज विजेताओं को संयुक्त ज़् से 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना (10.3 करोड़ रुपए), प्रदान किये जाएंगे। अगर एक से ज्यादा वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार जीतते हैं। तो यह प्राइज मनी उनके बीच बंट जाती है। पुरस्कार 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में दिए जाएंगे।

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