विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में केंद्रीय मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव वाले नोटिस सौंपे और देशभर में हो रहे एलपीजी की कमी के मुद्दे पर चर्चा की मांग की,
Delhi 13 March 2026,
आज शुक्रवार को विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में केंद्रीय मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग (महाभियोग प्रस्ताव) वाले नोटिस सौंपे और देशभर में हो रहे एलपीजी की कमी के मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए सदन में नारेबाजी की । इस विरोध प्रदर्शन के कारण लोकसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई और स्थगित भी की गई। संसद के दोनों सदनों को 16 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
एलपीजी संकट पर हुए विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और अन्य विपक्षी दलों ने भाग लिया। इन दलों के सांसदों ने संसद परिसर में सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और गैस सिलेंडर के आकार की तख्तियां उठाईं। लोकसभा में भी एलपीजी संकट को लेकर विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने भी इस विरोध प्रदर्शन में भाग लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा।
राज्यसभा में 18 निजी विधेयक पेश हुए जिसमें वरिष्ठ नागरिकों के योगदान संबंधी प्रावधान वाला विधेयक भी शामिल है। कांग्रेस ने शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आग्रह किया कि आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन रद्द किया जाए।
लोकसभा में शुक्रवार को, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों को पारित किया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये का आर्थिक स्थिरीकरण कोष (इकोनॉमिक स्टेबिलाइज़ेशन फंड) सरकारी योजनाओं को पटरी से उतारे बिना मौजूदा वैश्विक संकट जैसी स्थिति में देश को आर्थिक झटकों को सहन करने में मदद करेगा। लोकसभा में वित्त 8íवर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह कोष पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट जैसी आकस्मिक वैश्विक चुनौतियों से लगने वाले झटकों को झेलने के लिए एक ‘बफर’ के तौर पर काम करेगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में शुक्रवार को कुछ हल्के-फुल्के अंदाज में उत्तर प्रदेश के नगीना निर्वाचन क्षेत्र से आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सांसद को अपना नाम चंद्रशेखर ‘रावण’ की जगह चंद्रशेखर ‘विदुर’ रखने की सलाह दी।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने शुक्रवार को कटाक्ष करते हुए कहा कि यह सरकार अच्छे स्लोगन बनाने में सभी देशों को पीछे छोड़ चुकी है, लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग है क्योंकि यह ठोस परिणाम नहीं दे सकी है। ओ’ब्रायन ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान कहा कि बड़े-बड़े स्लोगन बनाने के बावजूद भारत बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है।
निजी अस्पतालों में महंगे इलाज और निजी एवं चिकित्सा बीमा कंपनियों द्वारा मरीजों के दावे मनमाने तरीके से खारिज किए जाने पर चिंता जाहिर करते हुए आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने मांग की कि इस पर अंकुश लगाना बेहद जरूरी है। उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए स्वाति ने कहा कि आज निजी अस्पतालों और निजी बीमा कंपनियों के बीच गठजोड़ बन गया है जो आम इंसान की कमर तोड़ रहा है।
कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने कृषि बीमा योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों को संकट के समय समुचित राहत नहीं मिलने का दावा करते हुए कहा कि किसानों के दावों का समय पर और उचित भुगतान करने की व्यवस्था की जानी चाहिए। शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए शुक्ला ने कहा कि कृषि बीमा योजना और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बड़े जोश से योजना शुरू की गई थी और कहा गया था कि किसानों को कम प्रीमियम पर संकट में बड़ी मदद मिलेगी।
विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने वाले नोटिस सौंपा।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 193 विपक्षी सांसदों ने इस मामले में संसद के दोनों सदनों में अलग-अलग नोटिस प्रस्तुत किए हैं। इनमें लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसद शामिल हैं। तृणमूल कांग्रेस इस पहल का नेतृत्व कर रही है, और इंडिया गठबंधन से जुड़े कई दलों के साथ-साथ आम आदमी पार्टी और कुछ निर्दलीय सांसदों ने भी इस नोटिस का समर्थन किया है। विपक्ष का कहना है कि यह कदम चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
नोटिस में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सात गंभीर आरोप लगाए गए हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पक्षपात दिखाई दे रहा है और कुछ मामलों में चुनावी गड़बड़ियों की जांच को जानबूझकर प्रभावित किया गया है। इसके अलावा, विपक्ष ने मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं, जिससे कई योग्य मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में उठा विवाद:- इस विवाद का मुख्य केंद्र पश्चिम बंगाल है, जहां विपक्ष का दावा है कि विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान लाखों वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। विपक्षी दलों का आरोप है कि इससे सत्ताधारी दल को चुनाव में लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस प्रक्रिया की आलोचना की है।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठे सवाल
इस मामले ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर बहस छेड़ दी है। विपक्ष का आरोप है कि आयोग अब स्वतंत्र तरीके से काम नहीं कर रहा है और इसके फैसलों में राजनीतिक पक्षपात की आशंका है। नोटिस में संविधान के अनुच्छेद 324(5) का भी उल्लेख किया गया है, जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के समान होती है।
इस विवाद पर सरकार या चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पहले मतदाता सूची पुनरीक्षण को सामान्य प्रक्रिया बताया था। यह मामला अब संसद के अंदर और बाहर चर्चा का विषय बन सकता है, जहां विपक्ष इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा मान रहा है।
