April 29, 2026

नारी शक्ति को निर्णय मंचों पर मिले भरपूर अवसरः डाॅ. धन सिंह रावत

राज्य विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र ‘नारी सम्मान–लोकतंत्र में अधिकार’ के दौरान कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त अवसर देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को 33% प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जिसे नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने आगे बढ़ाया।

डॉ. रावत ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने इस महत्वपूर्ण कानून का विरोध कर महिलाओं के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में किए गए प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

सहकारिता और नेतृत्व में बढ़ती भागीदारी

उन्होंने बताया कि सहकारी समितियों में 33% आरक्षण के परिणामस्वरूप महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। कुल 6486 निर्वाचित संचालकों में लगभग 39% यानी 2517 महिलाएं विजेता बनीं, जबकि 668 समितियों में से 281 की कमान महिलाओं के हाथों में है।

शिक्षा क्षेत्र में सुधार

शिक्षा के क्षेत्र में सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। बालिकाओं को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा, मुफ्त पाठ्यपुस्तकें और ड्रेस उपलब्ध कराई जा रही हैं। विद्यालयों और महाविद्यालयों में बालिका शौचालयों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। साथ ही, 39 कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावासों में छात्राओं को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है।

ड्रॉपआउट में कमी और नामांकन में वृद्धि

डॉ. रावत के अनुसार, इन प्रयासों का परिणाम यह हुआ है कि उच्च शिक्षा में बालिकाओं का ड्रॉपआउट 12% तक कम हुआ है, जबकि सकल नामांकन अनुपात (GER) 48% तक पहुंच गया है।

आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण

सरकार द्वारा ‘विद्या ज्योति छात्रवृत्ति’ और ‘गौरा देवी कन्या धन योजना’ जैसी योजनाओं के माध्यम से बालिकाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा रहा है। साथ ही, तीन विश्वविद्यालयों में महिला कुलपतियों की नियुक्ति कर महिला नेतृत्व को बढ़ावा दिया गया है।

भविष्य की योजनाएं

डॉ. रावत ने घोषणा की कि जल्द ही छात्र संघ चुनावों में छात्राओं को 50% प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को अवसर दिया जाए, तो वे नेतृत्व में उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं।

अंत में उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार का संकल्प है कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के माध्यम से महिलाओं को उनका उचित अधिकार मिले और समाज में उनकी भागीदारी और भी सशक्त हो।

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