हरीपुर की महिलाओं ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी, सरसों तेल यूनिट बनी मिसाल
कालसी विकासखंड के हरीपुर गांव की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास, मेहनत और उद्यमिता के दम पर आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल कायम की है। विकास महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन द्वारा संचालित कोल्ड एवं हॉट प्रेस्ड सरसों तेल यूनिट आज महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आर्थिक विकास का सफल मॉडल बनकर उभरी है।
ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (रीप) के अंतर्गत सितंबर 2024 में स्थापित इस यूनिट ने न केवल महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं, बल्कि स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने का रास्ता भी खोला है।
विकास महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन ने रीप परियोजना के सहयोग से 10 लाख रुपये की लागत से सरसों तेल यूनिट स्थापित की। इसमें 6 लाख रुपये परियोजना सहायता, 3 लाख रुपये बैंक ऋण तथा 1 लाख रुपये महिलाओं के स्वयं के अंशदान से जुटाए गए।
यूनिट में लकड़ी की घानी के माध्यम से कोल्ड प्रेस्ड तथा मशीन आधारित तकनीक से हॉट प्रेस्ड सरसों तेल का उत्पादन किया जा रहा है। उत्पाद की गुणवत्ता के कारण इसकी मांग कालसी, विकासनगर और देहरादून तक पहुंच चुकी है।
फेडरेशन के अंतर्गत 14 ग्राम संगठन, 120 स्वयं सहायता समूह और 764 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन से लेकर यूनिट संचालन तक महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है।
यूनिट से प्रतिमाह लगभग 70 हजार रुपये की आय अर्जित हो रही है। स्थापना के बाद से अब तक 24 से 25 लाख रुपये मूल्य का सरसों तेल बेचा जा चुका है। साथ ही चार से पांच महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है।
महिलाओं द्वारा उत्पादित सरसों तेल को ‘हिलान्स’ ब्रांड नाम से बाजार में उतारा गया है। शुद्धता और गुणवत्ता के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
इस सफलता का बड़ा उदाहरण तब सामने आया जब हाउस ऑफ हिमालय द्वारा यूनिट से 1700 लीटर सरसों तेल की खरीद की गई, जिससे महिलाओं को पांच लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई। इसके अलावा आईआईटी रुड़की को भी नियमित रूप से सरसों तेल की आपूर्ति की जा रही है।
वर्तमान में कोल्ड प्रेस्ड तेल 300 रुपये प्रति लीटर और हॉट प्रेस्ड तेल 240 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है।
तेल उत्पादन के दौरान निकलने वाली सरसों की खल भी महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का साधन बन गई है। फेडरेशन इसे किसानों और पशुपालकों को 25 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेच रहा है, जिससे आय के नए स्रोत विकसित हुए हैं।
फेडरेशन की सदस्य रीना चौहान के अनुसार समूह द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री अब ऑनलाइन माध्यमों से भी की जा रही है। विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और सरकारी कार्यक्रमों के जरिए उत्पादों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। यूनिट की जियो-मैपिंग प्रक्रिया भी चल रही है, जिससे उपभोक्ता भविष्य में सीधे यूनिट तक पहुंचकर उत्पाद खरीद सकेंगे।
रीना चौहान का कहना है कि रीप परियोजना ने महिलाओं को केवल रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि आत्मविश्वास और नई पहचान भी प्रदान की है। आज महिलाएं उत्पादन से लेकर विपणन तक की पूरी जिम्मेदारी स्वयं संभाल रही हैं।
जिला परियोजना प्रबंधक रीप, सोनम गुप्ता ने कहा कि कालसी ब्लॉक की यह पहल ग्रामीण उद्यमिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। महिलाओं के उत्पादों को स्थानीय बाजार, सरकारी संस्थानों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।
यह पहल पुष्कर सिंह धामी के आत्मनिर्भर उत्तराखंड और महिला सशक्तिकरण के विजन को धरातल पर साकार करती दिखाई दे रही है। हरीपुर की महिलाओं ने साबित कर दिया है कि अवसर और संसाधन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा भी बन सकती हैं।
समूह सदस्य: रीना चौहान
जिला परियोजना प्रबंधक रीप: सोनम गुप्ता