June 19, 2026

एम्स ऋषिकेश में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर राष्ट्रीय सम्मेलन, स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग पर जोर

AIIMs

12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में राष्ट्रीय सम्मेलन एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। आयुष विभाग और इंटिग्रेटिव मेडिसिन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य कर्मियों, शोधकर्ताओं, योग विशेषज्ञों और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि योग केवल युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों के स्वस्थ, सक्रिय और दीर्घायु जीवन का भी महत्वपूर्ण आधार है।

कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने किया। उन्होंने निवारक स्वास्थ्य देखभाल (प्रिवेंटिव हेल्थ केयर) के महत्व पर बल देते हुए कहा कि चिकित्सा सुविधाओं, स्वास्थ्य जागरूकता और टीकाकरण के कारण मानव जीवन प्रत्याशा बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी असंक्रामक बीमारियां नई चुनौतियों के रूप में सामने आई हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए योग को प्रभावी उपाय बताते हुए उन्होंने बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही योग से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डीन अकादमिक्स प्रो. सौरभ वार्ष्णेय ने भारत में तेजी से बढ़ रही वृद्ध जनसंख्या का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य वर्ष 2047 तक देश की लगभग 18 प्रतिशत आबादी वृद्धावस्था वर्ग में होगी। ऐसे में “हेल्दी एजिंग” की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। वहीं डीन रिसर्च प्रो. शैलेन्द्र हांडू ने स्वस्थ वृद्धावस्था और जीवन की गुणवत्ता में योग की भूमिका पर प्रकाश डाला तथा योग संबंधी शोध में वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित डेटा की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम में एसएसआईएआर बेंगलूरू की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. छाया ने हेल्दी एजिंग की अवधारणा पर व्याख्यान देते हुए क्रोनोलॉजिकल एज और बायोलॉजिकल एज के बीच अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि योग और ध्यान जैसे अभ्यास तनाव को कम करने, मानसिक संतुलन बढ़ाने, तंत्रिका तंत्र के बेहतर नियमन और समग्र स्वास्थ्य में सुधार करने में सहायक हैं।

वहीं स्कूल ऑफ योगा एंड नेचुरोपैथिक मेडिसिन, बेंगलूरू के प्राचार्य डॉ. अपार अविनाश ने स्वास्थ्य संवर्धन के लिए निवारक रणनीतियों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि व्यवहार परिवर्तन और आत्मबोध का एक प्रभावी माध्यम है, जो व्यक्ति को संतुलित और सार्थक जीवन जीने में मदद करता है।

आयुष विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका पठानिया ने योग शिक्षण से जुड़ी चुनौतियों और आवश्यक सावधानियों पर प्रतिभागियों को जागरूक किया। वहीं चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्वेता मिश्रा ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासनों, प्राणायाम और योगनिद्रा का अभ्यास कराया। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीलोय मोहन्ती ने पैनल चर्चा का संचालन किया।

कार्यक्रम के समापन पर बेस्ट ओरल प्रेजेंटेशन और बेस्ट पोस्टर प्रेजेंटेशन श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। सम्मेलन में योग को स्वस्थ जीवन, सक्रिय वृद्धावस्था और बेहतर जीवन गुणवत्ता का आधार बताते हुए इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया गया।

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