हरेला हरियाली महोत्सव-2026 में संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश, लोक कलाकारों ने बांधा समां
उत्तराखंड संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद की ओर से आयोजित हरेला हरियाली महोत्सव-2026 में लोक संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और हरेला पर्व के महत्व का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी तथा वन मंत्री सुबोध उनियाल शामिल हुए। इस अवसर पर हरेला पर्व की परंपराओं के संरक्षण के साथ राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला गया।
संस्कृति विभाग, उत्तराखंड शासन के तत्वावधान में संस्कृति प्रेक्षागृह, आकाशवाणी केंद्र के निकट, रिस्पना पुल, देहरादून में आयोजित महोत्सव का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में हरेला पर्व के सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और लोक परंपरागत महत्व पर संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें वक्ताओं ने प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संतुलन में हरेला की भूमिका पर विस्तार से विचार रखे।
महोत्सव में उत्तराखंड के लोक कलाकारों ने पारंपरिक लोकगीतों और लोकनृत्यों की रंगारंग प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। साथ ही अतिथियों ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार के पिछले पांच वर्षों की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया। परिषद की उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री) मधु भट्ट ने कहा कि हरेला केवल एक लोक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से हरेला का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
महोत्सव का समापन पर्यावरण संरक्षण, लोक संस्कृति के संवर्धन और हरेला पर्व की परंपराओं को आगे बढ़ाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
मधु भट्ट, उपाध्यक्ष, संस्क्रति, साहित्य एवं कला परिषद, उत्तराखण्ड सरकार।
