पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को तलाबीरा-II कोल ब्लॉक आवंटन मामले में मरणोपरांत हुए आरोप मुक्त:सुप्रीम कोर्ट ने दी क्लीन चिट,
Delhi 29 July 2026,
स्वच्छ छवि, सरल व्यक्तित्व और ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों की नींव रखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को तलाबीरा-II कोल ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह क्लीन चिट दे दी है। पीठ ने स्पष्ट किया कि, ट्रायल कोर्ट के पास इस मामले में जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और आरोपियों को ट्रायल के लिए बुलाने का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं था। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह फैसला सुनाया।
यह मामला वर्ष 2005 में ओडिशा के तलाबीरा-II कोल ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था। उस समय डॉ. मनमोहन सिंह के पास प्रधानमंत्री पद के साथ-साथ कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी था। वर्ष 2014 में सत्ता परिवर्तन के बाद कोयला ब्लॉक आवंटन की सीबीआई ने जांच शुरू की। लंबी जांच के बाद सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ अभियोजन चलाने लायक कोई आपराधिक सबूत नहीं मिला। एजेंसी ने दो अलग-अलग क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर ट्रायल कोर्ट को बताया कि इस मामले में आपराधिक साजिश या विश्वासघात का मामला नहीं बनता।
स्पेशल सीबीआई कोर्ट (ट्रायल कोर्ट ) ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को नहीं किया स्वीकार?
मार्च 2015 में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने अलग रुख अपनाया। अदालत ने जांच एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करने से इनकार करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह और पांच अन्य लोगों को आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए समन जारी कर दिया। पूर्व प्रधानमंत्री को आरोपी बनाए जाने के इस फैसले ने देशभर में राजनीतिक हलचल मचा दी थी। मामला तुरंत सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 1 अप्रैल 2015 को स्पेशल कोर्ट की कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। इसके बाद समन की वैधता और पूरे मामले पर लंबी सुनवाई चलती रही।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सीबीआई ने विस्तृत और स्वतंत्र जांच की थी। कोर्ट ने माना कि एजेंसी की दोनों क्लोजर रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया था कि अभियोजन चलाने योग्य कोई आपराधिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। पीठ ने यह भी कहा कि किसी ट्रायल कोर्ट को जांच एजेंसी की राय से असहमत होने का अधिकार जरूर है। लेकिन ऐसा निर्णय ठोस कानूनी कारणों और पर्याप्त आधार पर ही लिया जाना चाहिए। इस मामले में ऐसा नहीं हुआ, इसलिए स्पेशल सीबीआई कोर्ट का आदेश टिक नहीं सकता। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2015 का आदेश रद्द करते हुए सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली और पूरे मामले को औपचारिक रूप से बंद कर दिया।
अक्सर डॉ. मनमोहन सिंह की व्यक्तिगत ईमानदारी का लोहा उनके सबसे बड़े विरोधी भी मानते थे। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने मरणोपरांत उन पर लगाए गए तथा कथित आरोप से मुक्त कर दिया। यह फैसला केवल एक कानूनी प्रक्रिया का अंत नहीं है, बल्कि एक ऐसे नेता की बेदाग विरासत पर सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मुहर है, जिसने जीवनभर शुचिता की राजनीति की।
