मौजूदा केन्द्रीय सरकार को अब देश की आवाज और लोगों की अभिव्यक्ति की ताकत का एहसास हो रहा है: राहुल गांधी
Delhi 14 August 2026,
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नई दिल्ली के मावलंकर हॉल में आयोजित रचनात्मक कांग्रेस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। सम्मेलन में राहुल गांधी ने सरकार की नीतियों से लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विदेश नीति और देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तक कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। राहुल गांधी ने दावा किया कि मौजूदा केन्द्रीय सरकार को अब देश की आवाज और लोगों की अभिव्यक्ति की ताकत का एहसास हो रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि “हमारा काम बहुत आसान है, हम इनको पागल कर देंगे। आजकल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रात में सोते नहीं हैं। इसके कई कारण हैं, कुछ सामने हैं और कुछ छिपे हुए हैं।”उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम सरकार को लगातार सवालों के घेरे में रखना है। राहुल ने दावा किया कि मौजूदा सरकार को अब देश की आवाज और लोगों की अभिव्यक्ति की ताकत का एहसास हो रहा है। देश की जनता अब अपनी बात खुलकर कहने लगी है। उन्होंने कहा कि भारत को किसी एक विचार (आरएसएस) पहचान के खांचे में नहीं बांधा जा सकता। उनके मुताबिक देश में अलग-अलग सोच और विचार रखने वाले लोगों के लिए जगह होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जोर देते हुए कहा कि, “हम किसी एक खांचे में फिट होने वाले लोग नहीं हैं। हमारे पास हजारों तरह की पहचान और सोच है। हमें एक ही ढांचे में बंद नहीं किया जा सकता।” राहुल ने यहां तक कहा कि अगर कभी आरएसएस की अभिव्यक्ति को खत्म करने की बात होगी तो वह उसकी भी रक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए। बात पसंद न आए तो उसका जवाब दिया जा सकता है, लेकिन किसी की आवाज दबाना सही नहीं है।
गृहमंत्री अमित शाह को लेकर राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें कभी चाणक्य और सरदार पटेल जैसे नामों से जोड़ा जाता था, लेकिन अब वे संसद में नजर नहीं आए। राहुल ने इसे सरकार के भीतर बेचैनी से जोड़ते हुए कहा कि “अब इन्हें समझ आ गया है कि भारत अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेगा। गृहमंत्री अमित शाह 20 दिन तक संसद के मानसून सत्र में नहीं दिखे, क्योंकि पहली बार उन्हें समझ आ रहा है कि देश अपनी आवाज उठा रहा है।
विदेश नीति पर बात करते हुए राहुल गांधी ने मौजूदा हालात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के वक्त भारत के पास बातचीत की अगुवाई करने का बड़ा मौका था, जिसे गंवा दिया गया। अगर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जैसा मजबूत नेतृत्व होता तो भारत दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कर सकता था, लेकिन इसका श्रेय पाकिस्तान को मिल गया।
