September 4, 2026

चारधाम यात्रा में पर्यावरण संरक्षण की बड़ी पहल, 10.17 लाख से अधिक कंटेनर रीसाइक्लिंग के लिए लौटाए

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चारधाम यात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर तीर्थयात्रियों की भागीदारी का सकारात्मक असर सामने आया है। यात्रा प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, 19 अप्रैल से 26 अगस्त 2026 के बीच बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा पर आए श्रद्धालुओं ने रीसाइक्लिंग के लिए 10,17,200 से अधिक कंटेनर वापस किए हैं। यह आंकड़ा चारधाम यात्रा मार्ग को प्लास्टिक और पैकेजिंग कचरे से मुक्त रखने के लिए संचालित डिपॉजिट-रिटर्न एंड रिसाइक्लिंग सिस्टम (DDRS) जैसी जमीनी पहल की सफलता को दर्शाता है।

इस पहल के तहत तीर्थयात्री चारों धाम मार्ग पर बनाए गए विशेष कलेक्शन प्वाइंट पर क्यूआर-कोड वाली बोतलें और मल्टी-लेयर्ड पैकेजिंग (MLP) जमा कर सकते हैं। इसका उद्देश्य हिमालयी तीर्थ यात्रा मार्ग के साथ-साथ इन क्षेत्रों से निकलने वाली नदियों को पैकेजिंग कचरे से बचाना है।

बद्रीनाथ में सबसे अधिक कंटेनर जमा

19 अप्रैल से 26 अगस्त तक धामवार कलेक्शन में बद्रीनाथ धाम सबसे आगे रहा। यहां 3,04,771 कंटेनर वापस किए गए, जिसकी रिकवरी दर 94 प्रतिशत रही। वहीं गंगोत्री धाम में 2,72,864 कंटेनर और 97 प्रतिशत रिकवरी दर्ज की गई।

केदारनाथ धाम में 2,90,273 कंटेनर वापस किए गए, जबकि रिकवरी दर 90 प्रतिशत रही। इसी तरह यमुनोत्री धाम में 1,49,292 कंटेनर एकत्र किए गए और रिकवरी दर 92 प्रतिशत रही।

चारों धामों को मिलाकर कुल 10,17,200 कंटेनर वापस किए गए और औसत रिकवरी दर 93.25 प्रतिशत रही।

धाम एकत्रित कंटेनर रिकवरी दर
बद्रीनाथ 3,04,771 94%
गंगोत्री 2,72,864 97%
केदारनाथ 2,90,273 90%
यमुनोत्री 1,49,292 92%
कुल 10,17,200 93.25%

यात्रा सीजन के साथ और बढ़ेगा कलेक्शन

कुल कलेक्शन में सबसे बड़ा हिस्सा बद्रीनाथ का रहा। अधिकारियों के मुताबिक चारधाम यात्रा सीजन नवंबर तक जारी रहने और चारों मार्गों पर तीर्थयात्रियों की आवाजाही बने रहने के कारण कंटेनर कलेक्शन का आंकड़ा आने वाले समय में और बढ़ने की उम्मीद है।

उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि इस सीजन में गंगोत्री में करीब 2.73 लाख कंटेनर वापस किए गए और यहां 97 प्रतिशत रिकवरी दर दर्ज हुई, जो चारों धामों में सबसे अधिक है। यमुनोत्री में भी 90 प्रतिशत रिकवरी के साथ 1.49 लाख से अधिक कंटेनर वापस किए गए।

उन्होंने कहा कि भागीरथी और यमुना नदियों के उद्गम क्षेत्र होने के कारण गंगोत्री और यमुनोत्री पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील हैं। ऐसे में DDRS कार्यक्रम के माध्यम से तीर्थयात्रियों की बड़ी भागीदारी उत्साहजनक है।

चार साल में 31 गुना बढ़ी QR आधारित कंटेनर वापसी

आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार तीर्थयात्रा सीजन में इस पहल के प्रति श्रद्धालुओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है। 2022-23 के बाद से चारधाम मार्ग पर QR आधारित कंटेनर कलेक्शन में करीब 31 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इसी अवधि में कलेक्शन प्वाइंट्स की संख्या भी करीब छह गुना बढ़ी है।

वर्ष 2026-27 में वितरित किए गए क्यूआर-कोड वाले कंटेनरों की कलेक्शन दर 93.25 प्रतिशत तक पहुंचना इस अभियान की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

छोटी आदत से बड़ा बदलाव

चारधाम यात्रा में DDRS लागू करने वाली टीम के सदस्य के अनुसार, हर सीजन में अधिक संख्या में तीर्थयात्री अपनी बोतलों और पैकेजिंग को रास्ते में छोड़ने के बजाय निर्धारित कलेक्शन प्वाइंट पर वापस जमा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लाखों श्रद्धालुओं की ओर से अपनाई गई एक छोटी-सी आदत मिलकर चारधाम यात्रा मार्ग को अधिक स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में बड़ा योगदान दे रही है।

DDRS पहल का उद्देश्य चारधाम यात्रा मार्ग पर प्लास्टिक और पैकेजिंग कचरे को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना, उसे कम करना और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना है। तीर्थयात्रियों की बढ़ती भागीदारी से हिमालयी पर्यावरण संरक्षण की इस पहल को नई मजबूती मिल रही है।

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