ED कार्रवाई के बाद कांग्रेस में हलचल, मंगलौर सीट पर भी सामने आई दावेदारी
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत के निजी सहायक चंदन सिंह जीना के ठिकाने पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद उत्तराखंड कांग्रेस की राजनीति में हलचल तेज है। ईडी ने 2016 के ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कई स्थानों पर कार्रवाई की थी। एजेंसी के मुताबिक जीना के परिसर से 32 लाख रुपये की नकदी और महंगी घड़ियां बरामद की गईं। हरीश रावत का नाम ईडी की ओर से मामले में आरोपी के तौर पर नहीं बताया गया है।
ईडी की कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने कांग्रेस में अपने दो संगठनात्मक पदों से हटने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके कारण पार्टी के भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष को किसी तरह की कमजोरी पहुंचे। हालांकि, बाद में रावत ने स्पष्ट किया कि उनका कांग्रेस से अलग होने का इरादा नहीं है।
इस घटनाक्रम के बीच 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर नेताओं की सक्रियता भी चर्चा में है। पार्टी के भीतर हरीश रावत की चुनावी भूमिका को लेकर अलग-अलग चर्चाएं सामने आती रही हैं। वहीं, कांग्रेस के आगामी चुनावी पोस्टरों में उनके चेहरे को लेकर भी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा होने की बात कही जा रही है। इन दावों पर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक स्थिति सामने आना बाकी है।
मंगलौर सीट पर आदित्य राणा की सक्रियता
इसी बीच मंगलौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के पूर्व दर्जाधारी राज्य मंत्री आदित्य राणा ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ाई है। उनके चुनावी मैदान में उतरने की संभावनाओं को लेकर स्थानीय कांग्रेस की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है।
मंगलौर सीट से वर्तमान में कांग्रेस के काजी निजामुद्दीन विधायक हैं। कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर भी काजी निजामुद्दीन को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में सूचीबद्ध किया गया है।
मंगलौर में पिछले विधानसभा चुनावों में मुकाबला काफी करीबी रहा है। ऐसे में यदि पार्टी के भीतर एक से अधिक दावेदार सक्रिय होते हैं तो टिकट को लेकर होने वाली गतिविधियां चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती हैं। हालांकि, 2027 के लिए कांग्रेस की ओर से अभी किसी प्रत्याशी की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
अंदरूनी समीकरणों पर टिकी नजर
हरीश रावत प्रकरण और मंगलौर सीट पर सामने आई दावेदारी के बीच कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक और चुनावी समीकरणों पर नजर बनी हुई है। पार्टी ने जुलाई 2026 में उत्तराखंड के लिए राजनीतिक मामलों की समिति का गठन किया था, जिसमें हरीश रावत और काजी निजामुद्दीन समेत कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया था।
अब 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस के सामने संगठन को एकजुट रखने, संभावित दावेदारों के बीच समन्वय बनाने और सीटवार रणनीति तय करने की चुनौती है। मंगलौर में आदित्य राणा की सक्रियता आने वाले दिनों में पार्टी के स्थानीय समीकरणों को किस तरह प्रभावित करती है, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।
आदित्य राणा, पूर्व राज्य मंत्री
