October 3, 2026

गांधी जयंती पर जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ उत्तराखंड ने मनाया ‘मांग दिवस’, पत्रकारों के हितों और सुरक्षा को लेकर उठाई कई मांगें

Uttarakhand

गांधी जयंती के अवसर पर जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ उत्तराखंड की ओर से देशभर में कार्यरत पत्रकारों के हितों, अधिकारों, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक संरक्षण को लेकर ‘मांग दिवस’ मनाया गया। इस दौरान पत्रकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए कई प्रस्ताव पारित किए गए। साथ ही मांगों को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर शीघ्र सार्थक कदम उठाने की मांग की गई।

यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष उमाशंकर प्रवीण मेहता एवं प्रदेश महासचिव गिरीश पंत की ओर से राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में कहा गया कि पत्रकार लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुरक्षित मीडिया का वातावरण लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है। पत्र में बदलते मीडिया परिदृश्य के बीच पत्रकारों और मीडिया संस्थानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

नए मीडिया आयोग के गठन की मांग

यूनियन ने देश में एक नए और व्यापक मीडिया आयोग के गठन की मांग की। पत्र में कहा गया कि दूसरा प्रेस आयोग वर्ष 1978 में गठित हुआ था और उसने 1982 में अपनी रिपोर्ट दी थी। इसके बाद मीडिया के क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुए हैं। 24 घंटे के प्रसारण नेटवर्क, डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के विस्तार ने मीडिया के स्वरूप और सार्वजनिक संवाद को बदल दिया है।

यूनियन के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मीडिया क्षेत्र की चुनौतियों, नियमन, तकनीक और नैतिक पहलुओं की समीक्षा के लिए नए मीडिया आयोग का गठन आवश्यक है।

पत्रकारों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून की मांग

जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ उत्तराखंड ने पत्रकारों और मीडिया संस्थानों की सुरक्षा के लिए अलग से केंद्रीय कानून बनाने की मांग भी उठाई। यूनियन का कहना है कि पत्रकारों को शारीरिक हमलों, हिरासत, ऑनलाइन उत्पीड़न और संस्थागत दबाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

पत्र में कहा गया कि पत्रकार, मीडिया कर्मचारी और समाचार संगठन बिना भय के अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें, इसके लिए उन्हें हिंसा और अनुचित दबाव से सुरक्षा देने वाली प्रभावी कानूनी व्यवस्था जरूरी है।

वर्किंग जर्नलिस्ट के लिए विशेष सुरक्षा बहाल करने की मांग

यूनियन ने वर्किंग जर्नलिस्ट से जुड़े पुराने कानूनी सुरक्षा प्रावधानों को बहाल करने की मांग की। पत्र में वर्किंग जर्नलिस्ट एंड अदर न्यूजपेपर एम्प्लॉईज (सर्विस कंडीशंस) एंड मिसलेनियस प्रोविजन्स एक्ट, 1955 और वर्किंग जर्नलिस्ट (फिक्सेशन ऑफ रेट्स ऑफ वेजेज) एक्ट, 1958 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि नए श्रम कानूनों में इनके प्रावधानों के शामिल होने के बाद पत्रकारों को पहले उपलब्ध विशेष सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

यूनियन ने नौकरी की सुरक्षा, काम के घंटे, विवादों के समाधान और सेवा समाप्ति से जुड़े प्रावधानों को मजबूत किए जाने की मांग की।

मीडिया कर्मचारियों के लिए नए वेज बोर्ड की मांग

यूनियन ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया से जुड़े कर्मचारियों के लिए नए वेज बोर्ड के गठन की मांग भी की। यूनियन के अनुसार पत्रकारों और गैर-पत्रकार कर्मचारियों के लिए अंतिम कानूनी वेज बोर्ड के रूप में मजीठिया वेज बोर्ड का गठन वर्ष 2007 में हुआ था। इसके बाद महंगाई और जीवन-यापन की लागत में काफी बदलाव आया है।

यूनियन ने मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई को ध्यान में रखते हुए मीडिया कर्मचारियों के वेतन ढांचे की समीक्षा करने तथा नए वेज बोर्ड के गठन की मांग की।

‘स्वतंत्र और सुरक्षित प्रेस लोकतंत्र के लिए जरूरी’

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र की सजग प्रहरी है। पत्रकार समाज, शासन और व्यवस्था के बीच संवाद का सेतु होने के साथ जनसरोकारों, लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आवाज को व्यापक मंच प्रदान करते हैं।

वक्ताओं ने कहा कि देशभर में कार्यरत पत्रकारों के अधिकारों, सम्मान, सुरक्षा एवं सामाजिक-आर्थिक हितों के संरक्षण के लिए प्रभावी और ठोस पहल समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। यूनियन ने राष्ट्रपति से पत्रकारों और मीडिया कर्मचारियों से जुड़ी लंबे समय से लंबित मांगों पर केंद्र सरकार को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश देने की अपील की।

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