देहरादून के दोनों छावनी परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के विरुद्ध सेंसस एक्ट-1948 के अंतर्गत कार्यवाही की संस्तुति,
Dehradun , 01 February 2026,
देहरादून के दोनों छावनी परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के विरुद्ध सेंसस एक्ट-1948 के अंतर्गत कार्यवाही की संस्तुति की गई है। जिसके तहत एक माह तक का कारावास हो सकता है।
गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जिलाधिकारी को प्रमुख जनगणना अधिकारी नामित किया गया है। पूर्व में गृह मंत्रालय की और से दिशा निर्देश दिए गए थे कि, जनगणना चार्ज अधिकारियों की नियुक्ति, उनके साथ नियमित बैठकें आयोजित कर क्षेत्र निर्धारण, अन्तर्विभागीय समन्वय, कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करना तथा अधीनस्थ कर्मचारियों की नियुक्ति की कार्यवाही समयबद्ध रूप से पूर्ण कर त्वरित रूप से मंत्रालय को अवगत कराया जाए।
निदेशक जनगणना गृह मंत्रालय, भारत सरकार एवं जिला प्रशासन देहरादून की संयुक्त बैठक बीते 28 जनवरी 2026 को आहूत की गई। बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, कैन्ट बोर्ड गढ़ी एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, छावनी परिषद क्लेमनटाउन को विधिवत लिखित सूचना एवं दूरभाष के माध्यम से अवगत कराए जाने के बावजूद उनके द्वारा बैठक में प्रतिभाग नहीं किया गया। इस पर निदेशक जनगणना द्वारा कड़ा रोष व्यक्त किया गया।
इसके पश्चात 31 जनवरी 2026 को पुनः बैठक आयोजित की गई, जिसकी सूचना 28 जनवरी 2026 को ही प्रेषित कर दी गई थी। साथ ही अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) द्वारा बैठक के महत्व को स्पष्ट करते हुए दोनों छावनी परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से दूरभाष पर संपर्क कर बैठक में प्रतिभाग करने का अनुरोध भी किया गया। इसके बावजूद दोनों अधिकारी पुनः बैठक में अनुपस्थित रहे।
अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण संबंधित छावनी क्षेत्रों का क्षेत्र निर्धारण नहीं हो सका तथा जनगणना से संबंधित प्रारम्भिक कार्यवाही भी प्रारम्भ नहीं हो पाई। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए निदेशक जनगणना (गृह मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा जिला प्रशासन देहरादून को संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध सेंसस एक्ट-1948 के अंतर्गत कार्यवाही की संस्तुति की गई है। सेंसस एक्ट-1948 के तहत एक माह तक के कारावास का प्रावधान है।
