लोक संवर्धन पर्व में उमड़ी भीड़, 150 से अधिक स्टॉलों पर देशभर की शिल्पकला का संगम
भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय तथा उत्तराखण्ड सरकार के उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम के सहयोग से परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित छठे लोक संवर्धन पर्व के तीसरे दिन भी बड़ी संख्या में लोगों ने महोत्सव का आनंद लिया। भारत की समृद्ध शिल्प परंपराओं, हस्तनिर्मित उत्पादों और पारंपरिक कारीगरी को समर्पित यह आयोजन आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
कतर के पूर्व अमीर महामहिम शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर भारत सरकार द्वारा घोषित एक दिवसीय राष्ट्रीय शोक के सम्मान में दिनभर के सभी सांस्कृतिक कार्यक्रम और मनोरंजन प्रस्तुतियां स्थगित रखी गईं। इसके बावजूद प्रदर्शनी और फूड कोर्ट में लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली। आगंतुकों ने विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पादों और पारंपरिक कलाकृतियों की खरीदारी की।
महोत्सव में 150 से अधिक प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें लगभग 40 प्रतिशत स्टॉल उत्तराखण्ड के कारीगरों के लिए आरक्षित हैं। शेष स्टॉलों पर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, दिल्ली, पंजाब, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, कर्नाटक, गुजरात, लद्दाख, महाराष्ट्र, असम, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और गोवा सहित देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के कारीगर अपनी कला और शिल्प का प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रदर्शनी में हैंड ब्लॉक प्रिंट, कढ़ाई व क्रोशिया उत्पाद, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, लकड़ी की कलाकृतियां, हस्तकढ़ाई वाले वस्त्र, धातु शिल्प, हथकरघा वस्त्र, पर्यावरण-अनुकूल गृह सज्जा सामग्री, रेजिन क्राफ्ट, पीतल उत्पाद, इत्र, पारंपरिक चूड़ियां, चन्नपटना के खिलौने, कोटा डोरिया वस्त्र, जरी कार्य, चमड़े के उत्पाद, अजरख हैंड ब्लॉक प्रिंट, ऐपण कला और खादी उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला लोगों को आकर्षित कर रही है।
कारीगरों और उद्यमियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (निस्बड) द्वारा एक संवादात्मक क्षमता निर्माण सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें व्यवसाय विस्तार, उद्यमिता विकास और बाजार से जुड़ाव से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम के प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रीय शोक के कारण सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थगित किए गए हैं, लेकिन महोत्सव की मूल भावना देश के कारीगरों की कला और पारंपरिक विरासत को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि आगंतुकों का उत्साह कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
महोत्सव के फूड कोर्ट में उत्तराखण्ड के पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों के साथ देश के विभिन्न राज्यों के लोकप्रिय स्वादिष्ट व्यंजन भी उपलब्ध हैं, जिससे यह आयोजन परिवारों और पर्यटकों के लिए एक संपूर्ण सांस्कृतिक अनुभव बन गया है।
लोक संवर्धन पर्व 15 जुलाई 2026 तक परेड ग्राउंड, देहरादून में प्रतिदिन सुबह 11:30 बजे से रात 9:00 बजे तक आम जनता के लिए निःशुल्क खुला रहेगा। 14 जुलाई से सांस्कृतिक कार्यक्रम दोबारा शुरू होंगे, जिनमें उत्तराखण्ड के लोकप्रिय लोक बैंड पांडवास सहित कई प्रसिद्ध लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।