नेपाल के रसुवा में भीषण बाढ़ से तबाही, कई पर्यटक लापता; 100 पुलिसकर्मी भी संपर्क से बाहर
नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। चीन-नेपाल सीमा के पास भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ से कई बस्तियां, सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में लोग संपर्क से बाहर हैं और राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया गया है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए रसुवागढ़ी पहुंचे 384 पर्यटक और यात्री संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। शुरुआती रिपोर्टों में कैलाश मानसरोवर जा रहे करीब 50 पर्यटकों से संपर्क टूटने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन बाद में उपलब्ध आंकड़ों में यह संख्या बढ़कर 384 हो गई।
बाढ़ का असर सुरक्षा बलों पर भी पड़ा है। रेडियो नेपाल के मुताबिक रसुवा में तैनात 26 पुलिसकर्मी लापता हैं। ये पुलिसकर्मी तिमुरे, स्याफ्रुबेसी, सिम्ले और मैलुंग क्षेत्र की इकाइयों में तैनात थे। राहत और बचाव दल लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।
हेलीकॉप्टर से राहत-बचाव अभियान तेज
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नेपाली सेना और निजी कंपनियों के हेलीकॉप्टरों को तैनात किया गया है। नेपाली सेना के प्रवक्ता राजाराम बस्नेत के अनुसार, 14 हेलीकॉप्टर राहत एवं बचाव अभियान में लगाए गए हैं, जिनमें छह नेपाली सेना और आठ निजी क्षेत्र के हेलीकॉप्टर शामिल हैं। सेना ने अब तक 25 लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी दी है। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सकीय सहायता के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी तैनात की गई है।
कई इलाकों में संचार व्यवस्था प्रभावित
अचानक आई बाढ़ से रसुवा के स्याफ्रुबेसी, तिमुरे, हाकुबेसी, मैलुंग समेत कई इलाके प्रभावित हुए हैं। कई स्थानों पर सड़क संपर्क टूट गया है और संचार व्यवस्था भी बाधित हुई है, जिससे प्रभावित लोगों की सही स्थिति का पता लगाने में कठिनाई आ रही है।
प्रारंभिक वैज्ञानिक आकलनों में बाढ़ के पीछे हिमस्खलन या ग्लेशियर क्षेत्र में प्राकृतिक अवरोध टूटने की आशंका जताई गई है। हालांकि बाढ़ के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्यों में नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाली सेना को लगाया है। प्रभावित और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। भारत और चीन से भी राहत एवं बचाव प्रयासों में सहयोग मांगा गया है।
