Recent Posts

May 16, 2026

भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को 2017 के ण रेप मामले में बड़ा झटका: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के सजा निलंबन आदेश को पलटा,

Delhi 15 May 2026,

सुप्रीम कोर्ट से शुक्रवार को भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को 2017 के उन्नाव रेप मामले में बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें 2017 के उन्नाव रेप मामले में कुलदीप सिंह सेंगर की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट द्वारा दी गई जेल की सजा को निलंबित कर दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय को इस मामले में सेंगर की दोषसिद्धि के खिलाफ अपील पर शीघ्र, अधिकतम दो महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यदि अपील पर जल्द फैसला नहीं होता हैतो  उच्च न्यायालय को सेंगर की जेल की सजा को निलंबित करने की याचिका पर पुनर्विचार करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन सीबीआई द्वारा दायर एक अपील पर यह आदेश पारित किया, जिसमें उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें सेंगर की जेल की सजा को निलंबित कर दिया गया था और बलात्कार के आरोप में उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील लंबित रहने के दौरान उन्हें जमानत पर रिहा करने की अनुमति दी गई थी। पीठ ने कहा, “हम अपील स्वीकार करते हैं। विवादित आदेश रद्द किया जाता है। उच्च न्यायालय दो महीने के भीतर मुख्य अपील पर निर्णय लेने का प्रयास करेगा। यदि अपील पर सुनवाई संभव न हो, तो सजा स्थगन के आवेदन के संबंध में नया आदेश पारित किया जाए। गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की जाएगी। न ही सजा स्थगन का आवेदन इस न्यायालय के आदेश से प्रभावित होगा। ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने से पहले उचित आदेश पारित किए जाएं।”

आज की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय की उस पूर्व प्रथम दृष्टया टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई कि यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत गंभीर यौन उत्पीड़न का अपराध सेंगर के खिलाफ नहीं बनता है। गौरतलब है कि पॉक्सो अधिनियम के तहत, यदि किसी लोक सेवक द्वारा यौन उत्पीड़न किया जाता है तो वह गंभीर यौन उत्पीड़न बन जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट इस दृष्टिकोण से कड़ी असहमति व्यक्त की। जस्चिस बागची ने कहा कि हम उच्च न्यायालय के अति-तकनीकी निष्कर्ष का समर्थन नहीं करते हैं। यह एक दंडात्मक कानून है जो बच्चों को यौन शोषण से बचाता है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सेंगर की प्रभाव की बात कही।

सेंगर के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन ने सवाल उठाया कि क्या पॉक्सो अधिनियम वास्तव में लागू होता है या नहीं। हरिहरन ने अदालत को बताया कि मैं यह साबित कर सकता हूं कि पीड़िता नाबालिग नहीं है। एम्स बोर्ड का भी कहना है कि वह नाबालिग नहीं थी। सभी रिपोर्टें सेंगर के पक्ष में हैं फिर भी वह जेल में है। इस पर तुषार मेहता ने विधायक के प्रभाव का मुद्दा उठाया।

 

यह मामला 17 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार से संबंधित है। आरोप है कि सेंगर ने 11 से 20 जून, 2017 के बीच उसका अपहरण कर उसके साथ बलात्कार किया। इसके बाद उसे 60 हजार रुपये में बेच दिया गया, जिसके बाद उसे माखी पुलिस स्टेशन से बरामद किया गया। पीड़िता को सेंगर के कहने पर पुलिस अधिकारियों द्वारा लगातार धमकाया गया और चेतावनी दी गई कि वह इस बारे में कुछ न बोले। अंततः सेंगर के खिलाफ बलात्कार, अपहरण और आपराधिक धमकी के साथ-साथ बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) की धारा के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर सेंगर को गिरफ्तार कर लिया गया था। अगस्त 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव बलात्कार मामले से संबंधित चार मामलों की सुनवाई दिल्ली स्थानांतरित कर दी और आदेश दिया कि इसकी सुनवाई प्रतिदिन के आधार पर की जाए और 45 दिनों के भीतर पूरी की जाए।

 

 

 

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

Copyright2017©Spot Witness Times. Designed by MTC, 9084358715. All rights reserved. | Newsphere by AF themes.