इंटक स्थापना दिवस पर श्रमिक मुद्दों को लेकर सरकार पर साधा निशाना
इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) के स्थापना दिवस के अवसर पर देहरादून स्थित कांग्रेस भवन में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेशभर से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया और श्रमिकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे।
इतिहास पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने बताया कि 3 मई 1947 को महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और भीमराव अंबेडकर जैसे महान नेताओं ने श्रमिकों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से इंटक की स्थापना की थी, जिसमें गुलजारीलाल नंदा को पहला अध्यक्ष बनाया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश इंटक अध्यक्ष हीरा सिंह विष्ट ने की। इस दौरान वक्ताओं ने केंद्र और उत्तराखंड सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए श्रमिकों के शोषण पर चिंता व्यक्त की।
वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश के सेलाकुई, हरिद्वार, सिडकुल, उधम सिंह नगर और नैनीताल समेत विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल रहा है, जिससे कर्मचारी आंदोलनरत हैं। साथ ही “समान कार्य के लिए समान वेतन” के मुद्दे पर न्यायालय के निर्देशों के बावजूद विभागों द्वारा देरी पर भी नाराजगी जताई गई।
अपने संबोधन में हीरा सिंह विष्ट ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार श्रमिक, किसान, युवा और महिलाओं के हितों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि लगभग 60 हजार पद खाली होने के बावजूद युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा, जिससे आक्रोश बढ़ रहा है। साथ ही पेपर लीक जैसी घटनाओं को बेरोजगारों के साथ अन्याय बताया।
प्रदेश इंटक के प्रमुख महामंत्री ए.पी. अमोली ने कहा कि श्रम कानूनों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रमिकों से 8 घंटे से अधिक काम लिया जा रहा है, लेकिन ओवरटाइम नहीं दिया जाता, साप्ताहिक अवकाश लागू नहीं होता और महिला कर्मियों को आवश्यक सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिनिधियों ने श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
