चाइल्ड पोर्नोग्राफी के खिलाफ STF की बड़ी कार्रवाई, हल्द्वानी में 11 शिकायतों के बाद मुकदमा दर्ज
उत्तराखंड में बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन यौन अपराधों और चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर अंकुश लगाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बड़ी कार्रवाई की है। नैनीताल जिले के हल्द्वानी में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से मिली 11 शिकायतों के आधार पर पुलिस ने एक आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। जांच के दौरान आरोपी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से अश्लील फोटो और वीडियो बरामद हुए हैं। वहीं, एक नाबालिग के साथ अश्लील कृत्य की वीडियोग्राफी किए जाने का मामला भी सामने आया है।
आईजी एसटीएफ डॉ. नीलेश भरणे के मुताबिक, 25 अक्टूबर को प्राप्त NCRP की 11 शिकायतों के आधार पर कोतवाली हल्द्वानी में मुकदमा संख्या 373/2026 दर्ज किया गया। मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 14/15 और आईटी एक्ट की धारा 67बी के तहत कार्रवाई की गई है।
विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी से दो रियलमी मोबाइल फोन, एक लेनोवो टैबलेट, एक एचपी लैपटॉप और मोबाइल बॉक्स बरामद किया। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में लैपटॉप के टाइम फोल्डर और ब्रेव व क्रोम ब्राउजर की हिस्ट्री में आपत्तिजनक अश्लील वीडियो और फोटो मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा तीन ईमेल आईडी भी साइबरटिपलाइन से प्राप्त शिकायतों से जुड़ी मिली हैं।
एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी डार्क वेब और डिस्कॉर्ड के माध्यम से अश्लील सामग्री डाउनलोड कर रहा था। जांच के दौरान एक नाबालिग के साथ अश्लील कृत्य की वीडियोग्राफी किए जाने का भी खुलासा हुआ है। एसटीएफ अब मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों और अन्य संभावित कड़ियों की जांच कर रही है।
2026 में अब तक 150 मुकदमे दर्ज
आईजी एसटीएफ डॉ. नीलेश भरणे ने बताया कि बच्चों से संबंधित ऑनलाइन अश्लील सामग्री और साइबर अपराधों के खिलाफ एसटीएफ लगातार कार्रवाई कर रही है। नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (NCMEC), साइबरटिपलाइन और NCRP से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर वर्ष 2026 में अब तक प्रदेश में 150 अभियोग दर्ज किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पुलिस की प्राथमिकता है और इस तरह के अपराधों में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। एसटीएफ की इस कार्रवाई को इंटरनेट के माध्यम से बच्चों के यौन शोषण और अश्लील सामग्री के प्रसार पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
डॉ. नीलेश भरणे, IG STF
