घर में मोमबत्तियां बनाकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहीं वीना, स्वयं सहायता समूह बना महिलाओं का सहारा
उत्तराखंड की ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई कहानियां लिख रही हैं। घर की जिम्मेदारियों के साथ छोटे-छोटे कारोबार शुरू कर महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल ग्राम दानकोट की वीना हैं, जो घर पर ही आकर्षक सजावटी मोमबत्तियां बनाकर अपनी अलग पहचान बना रही हैं।
वीना साई बाबा स्वयं सहायता समूह की सचिव हैं और गौरा देवी संगठन से भी जुड़ी हुई हैं। वह घर पर ही दीपक, लड्डू, फूल और कमल के आकार की आकर्षक मोमबत्तियां तैयार करती हैं। खास बात यह है कि त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए वह अलग-अलग रंगों और डिजाइन की मोमबत्तियां बना रही हैं। पीले, नारंगी, गुलाबी, नीले और हरे रंग की टी-लाइट के साथ लंबी सजावटी कैंडल लोगों को खूब पसंद आ रही हैं। उनके इस प्रयास से ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं और महिलाएं घर बैठे अपनी प्रतिभा को रोजगार में बदल रही हैं।
इस पहल को महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण बताते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की धुरी बन रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
नरेश बंसल के मुताबिक, स्वयं सहायता समूहों को कारोबार आगे बढ़ाने के लिए बैंक ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, हिलांस ब्रांड के माध्यम से महिलाओं के उत्पादों को बाजार और पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है। सरस मेले और विभिन्न रोजगार मेलों में स्टॉल उपलब्ध कराकर महिला समूहों को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार अब स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भी तैयारी कर रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को व्यापक पहचान मिलेगी और उनके कारोबार को नई संभावनाएं मिलेंगी।
दानकोट की वीना का प्रयास इस बात का उदाहरण है कि उचित अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर को स्वरोजगार का माध्यम बना सकती हैं। स्वयं सहायता समूहों के जरिए तैयार हो रही ऐसी पहलें न केवल महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं।
वीना, सचिव, साईं बाबा स्वयं सहायता समूह
